पूर्व मंत्री परगट सिंह ने पत्रकारवार्ता कर सरकार को घेरा कहा, यह राजनीतिक मुद्दा नहीं, 2008 की बजाए 2018 के संशोधित कानून को पास करवाने पर जोर दे सरकार सभी धर्मों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की सलाह भी शामिल की जानी चाहिए, तभी पास हो कानून
पूर्व मंत्री परगट सिंह ने पत्रकारवार्ता कर सरकार को घेरा कहा, यह राजनीतिक मुद्दा नहीं, 2008 की बजाए 2018 के संशोधित कानून को पास करवाने पर जोर दे सरकार सभी धर्मों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की सलाह भी शामिल की जानी चाहिए, तभी पास हो कानून
खबर खास, चंडीगढ़ :
पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने पंजाब कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाते हुए कहा कि बेअदबी केसों में इंसाफ दिलाने के लिए पंजाब सरकार की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल को स्पेशल सैशन बुलाकर जो बेअदबी संबंधी नया कानून बनाने की बात कही जा रही है, वह सरासर राज्य के लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।
परगट ने कहा कि सरकार 2008 में बने ‘दी पंजाब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी (प्रिंटिंग प्रेसेस एंड पब्लिकेशन) एक्ट-2008’ को नया कानून बताकर पास करना जा रही है, जबकि इसका सरकार को कोई फायदा नहीं होने वाला है। यह सरकार का बिना सोचे समझे लिए गया गलत फैसला साबित होगा। इस कानून को पास करने से पहले सभी धर्मों के माहिरों से सुझाव लिया जाना चाहिए था। लेकिन उन्हें नहीं लगता है कि मुख्यमंत्री मान ने किसी से कोई सलाह नहीं ली होगी।
परगट सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री मान बिना किसी की सलाह और चर्चा कराए पास करवाने के लिए पेश करने जा रहे हैं। जबकि 2008 के इस कानून को संशोधित करवाने की बजाए मान सरकार को चाहिए कि वह 2018 के संशोधित कानून को पास कराए। इस बिल में सभी सख्त सजाएं हैं, जिसकी बात मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बिल को केंद्र सरकार से मंजूरी भी आसानी से मिल सकेगी। नया बिल जब संशोधित होगा तो इसकी मंजूरी भी आर्टिकल 254 के तहत राष्ट्रपति के पास से लेनी होगी या फिर यह बिल संसद के पास मंजूरी के लिए जाएगा। जिसमें बहुत लंबा समय लगने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि 2016 में जो बेअदबी को लेकर जो कानून बनाना गया था, उसमें भी 10 साल और उसमें भी सख्त सजाओं का प्रावधान था, लेकिन केंद्र ने उसे इसे एक राज्य और एक धर्म के लिए मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। तब कांग्रेस की निवर्तमान सरकार ने इस बिल को 2018 में संशोधित किया। जिसमें सभी धार्मिक ग्रंथों को शामिल किया गया था और सजा में आईपीसी की धारा 295AA शामिल की गई थी। जिसमें उम्र कैद की सजा का प्रावधान रखा गया है। लेकिन इस बिल को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी। इसी कारण यह कानून लागू नहीं किया जा सका।
परगट सिंह ने कहा कि आप सरकार जुलाई 2025 में जो नया प्रस्ताव पंजाब प्रीवेंशन ऑफ ऑफेंसेस अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल-2025 लाई थी, लेकिन भगवंत मान ने इसे बिना कारण ही रद्द कर दिया। जबकि इसमें कई खामियां होने के कारण इसे विधानसभा ने सिलेक्ट कमेटी को भेजा था। लेकिन सिलेक्ट कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में क्या कहा, इसका खुलासा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि विधानसभा स्पीकर को चाहिए कि वह सिलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट मंगवाएं और उसे सार्वजनिक करें, ताकि पता चल सके कि इसमें कौन शामिल थे और उसमें क्या समस्याएं थीं। इस कानून को लेकर माहिरों के जो सुझाव हैं उन पर अमल किया जा सके और इसे सही तरफ मोड़ा जा सके।
आगे पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार नए कानून लाने की बात कर रही है, लेकिन पुरान केसों में आम आदमी पार्टी की सरकार ने फाइलों को एक इंच भी आगे नहीं बढ़ाया है। चाहे वह बरगाड़ी कांड या फिर बहिकलां कलां और मोड़ मंडी ब्लास्ट जैसे केसों में किसी को इंसाफ नहीं मिला। जबकि इन केसों में गोली भी चली और बम का इस्तेमाल हुआ। जिसमें सरकार आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त धाराएं भी लगा सकती थी। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ बचने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप का जिक्र भी किया। कहा कि सरकार ने उसे पोस्टर व्बॉय बनाकर बेअदबी केसों में इंसाफ की बात की और लोगों को गुमराह किया। अब फिर नए कानून के नाम पर फिर वही करने जा रहे हैं। परगट ने कहा कि भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों ही आरएसएस के अंदर काम करते हैं। इसलिए सरकार उनके बताए एजेंडे पर ही काम कर रही है।
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