वर्ष 2025 के दौरान पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कीं—एन.आई.आर.एफ. 2025 में 77वाँ स्थान तथा टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में 601–800 वैश्विक रैंक बैंड में स्थान।
खबर खास, बठिंडा :
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में गत सप्ताह आयोजित विश्वविद्यालय कोर्ट की 14वीं बैठक में शैक्षणिक सत्र 2024–25 की वार्षिक प्रतिवेदन तथा वित्तीय वर्ष 2024–25 के लेखापरीक्षित लेखा विवरण एवं पृथक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन को स्वीकृति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के सर्वोच्च वैधानिक निकाय विश्वविद्यालय कोर्ट ने इन दस्तावेज़ों को संसद के दोनों सदनों के पटल पर प्रस्तुत करने हेतु शिक्षा मंत्रालय को प्रस्तुत करने तथा आम जनता के लिए प्रसारित करने के लिए सर्वसम्मति से अनुमोदन दिया।
बैठक में विश्वविद्यालय कोर्ट के अध्यक्ष-सह-माननीय कुलाधिपति प्रोफेसर जगबीर सिंह सहित भौतिक एवं ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रोफेसर राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने उनके सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने 19 दिसंबर 2024 को आयोजित पिछली बैठक के उपरांत विश्वविद्यालय की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया, जिसमें शैक्षणिक, शोध तथा अवसंरचना संबंधी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।
कुलपति प्रोफेसर राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान विश्वविद्यालय ने एन.आई.आर.एफ. रैंकिंग 2025 की विश्वविद्यालय श्रेणी में 77वाँ स्थान प्राप्त कर लगातार 7वीं बार देश के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में स्थान सुनिश्चित किया। इसके अतिरिक्त, टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने 601–800 वैश्विक रैंक बैंड में स्थान प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान अर्जित की। प्रस्तुतीकरण में प्रमुख शैक्षणिक पहलों, शोध सहयोगों, प्रकाशनों एवं परियोजनाओं, भौतिक एवं शैक्षणिक अवसंरचना के विकास, शिक्षण–अधिगम प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने तथा शोध उत्पादन में वृद्धि हेतु किए गए प्रयासों का विवरण दिया गया। विश्वविद्यालय कोर्ट के सदस्यों ने प्रशासन, संकाय एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए शैक्षणिक कार्यक्रमों, शोध उत्पादकता तथा अवसंरचनात्मक विकास में हुई प्रगति की प्रशंसा की।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय कोर्ट के सदस्यों ने नवाचार को बढ़ावा देने, छात्रों की रोजगार क्षमता सुदृढ़ करने तथा अकादमिक पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने हेतु भविष्य उन्मुख सुझाव साझा किए। उन्होंने छात्रावास निर्माण कार्य में तेजी लाने पर बल दिया तथा उद्योग–अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही गैर-शैक्षणिक क्षेत्रों में विद्यार्थियों के प्लेसमेंट का विस्तार कर छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से मेंटर पैनल के गठन का प्रस्ताव रखा गया, ताकि कृषि-आधारित स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन मिल सके।
बैठक के दौरान हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय कोर्ट आने वाले वर्षों में बेहतर प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समाज पर सकारात्मक प्रभाव को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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