12 मई को नामांकन पत्रों की जांच, 14-15 मई को नाम वापसी; 26, 28 और 30 मई को मतदान
12 मई को नामांकन पत्रों की जांच, 14-15 मई को नाम वापसी; 26, 28 और 30 मई को मतदान
खबर खास | शिमला
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया गुरुवार, 7 मई से शुरू हो रही है। उम्मीदवार 7, 8 और 11 मई को अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
निर्देशों के अनुसार, पंचायत प्रधान और पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवार पंचायत कार्यालय में सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) के समक्ष नामांकन दाखिल करेंगे। पंचायत समिति पद के उम्मीदवार तहसील कार्यालय में तहसीलदार के पास नामांकन जमा करेंगे, जबकि जिला परिषद उम्मीदवारों को एसडीएम कार्यालय में अपने नामांकन पत्र दाखिल करने होंगे।
जिला निर्वाचन कार्यालयों ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, नामांकन पत्रों की जांच 12 मई को की जाएगी। उम्मीदवार 14 और 15 मई को अपने नाम वापस ले सकेंगे। अंतिम उम्मीदवार सूची और चुनाव चिन्हों का आवंटन 15 मई को पूरा किया जाएगा।
पंचायती राज चुनावों के लिए मतदान तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को कराया जाएगा।
जरूरी दस्तावेज
उम्मीदवारों का नाम मतदाता सूची में होना अनिवार्य है। इसके अलावा उन्हें पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और चुनाव आयोग द्वारा जारी स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा।
इस घोषणा पत्र में यह प्रमाणित करना होगा कि उम्मीदवार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह नशे से जुड़े मामलों में शामिल नहीं है, किसी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं किया है, बैंक डिफॉल्टर नहीं है और उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है।
पंचायत समिति और जिला परिषद पदों के उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज बीडीओ कार्यालय से सत्यापित भी करवाने होंगे।
कौन लड़ सकता है चुनाव
आशा वर्कर, आउटसोर्स कर्मचारी, होमगार्ड, कृषि सहायक, निजी डिपो धारक, वर्ष 2006 में स्व-घोषणा के जरिए कब्जा नियमित कराने वाले लोग, मनरेगा सोशल ऑडिट कर्मचारी और नंबरदार चुनाव लड़ने के पात्र होंगे।
कौन नहीं लड़ सकेगा चुनाव
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति (कुछ मामलों में उनके परिवार के सदस्य भी), आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर, मिड-डे मील कर्मचारी, जल रक्षक और सहकारी समितियों के सेल्समैन या सचिव चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
इसके अलावा अदालतों में लंबित अपील या पुनरीक्षण मामलों वाले लोग भी अयोग्य माने जाएंगे। अवैध कब्जे के कारण बेदखल किए गए व्यक्तियों को जमीन खाली करने के बाद भी छह साल तक चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी।
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