गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर खास तौर से पहुंचेंगे जालंधर, प्रशासन व डेरा प्रबंधन ने की तैयारियां शुरू पीएम के दौरे को 2027 के विस चुनाव से पहले भाजपा की ओर से दोआबा बेल्ट को टारगेट के तौर पर देखा जा रहा है
गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर खास तौर से पहुंचेंगे जालंधर, प्रशासन व डेरा प्रबंधन ने की तैयारियां शुरू पीएम के दौरे को 2027 के विस चुनाव से पहले भाजपा की ओर से दोआबा बेल्ट को टारगेट के तौर पर देखा जा रहा है
खबर खास, चंडीगढ़ :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक फरवरी को पंजाब दौरे पर आ रहे हैं। उनके पंजाब आने का विशेष कारण है गुरु रविदास महाराज जी की 649वीं जयंती। इस दौरान वह जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां में नतमस्तक होंगे और गुरु रविदास जी महाराज के प्रकाश पर्व (जयंती) के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। पीएम यहां शाम चार बजे पहुंचेंगे। इसे लेकर प्रशासन और डेरा प्रबंधन ने बकायदा तैयारियां भी शुरू कर दी हैं जबकि केंद्रीय एजेंसियां पंजाब पहुंच गई हैं।
इस बात की पुष्टि की है लुधियाना से पूर्व सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने। उन्होंने कहा कि पीएम एक फरवरी को शाम चार बजे पंजाब पहुंचेंगे। यहां उल्लेखनीय है कि बीती 25 जनवरी को ही डेरा सचखंड बल्लां के संत निरंजन दास जी के नाम की घोषणा पद्मश्री अवार्ड के लिए की गई थी। जिसके बाद ही पीएम का दौरा हो रहा है। इसे पंजाब में 2027 चुनाव से पहले भाजपा की दोआबा बेल्ट को टारगेट के तौर जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन हैं संत निरंजन दास...
पद्मश्री के लिए जिन संत निरंजन दास जी के नाम का ऐलान हुआ है वह एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता और धर्म गुरु हैं। वह डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत हैं, जो सबसे बड़े रैदासी/रविदासिया धार्मिक समुदायों में से एक का नेतृत्व करता है। उनका जन्म 6 जनवरी 1942 को जालंधर (पंजाब) के रामदासपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम साधु राम जी और माता का नाम रुक्मणी जी था।बचपन से ही वे धार्मिक जीवन से जुड़े थे और आठ वर्ष की उम्र से ही डेरा सचखंड में सेवा करने लगे। वहां उन्होंने कई संतों के साथ रहकर आध्यात्मिक सीख और सेवा की शिक्षा पाई। 1994 में उन्हें डेरा सचखंड बल्लां का प्रमुख (गद्दीनशीन) बनाया गया। तब से वे रैदासिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक नेता हैं। वे धार्मिक कार्यक्रमों, मंदिरों और सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने भारत और विदेशों में कई धार्मिक व सामाजिक योजनाओं का नेतृत्व किया है। कहा जाता है कि उनके माता-पिता श्री 108वें संत बाबा पीपल दास जी और श्री 108वें संत सरवन दास जी के भक्त थे। जब भी उन्हें घर के कामों से फुर्सत मिलती, वे डेरा बल्लन जाते, प्रवचन सुनते और डेरा में सेवा करते थे। उनके प्यारे बेटे निरंजन दास हमेशा उनके साथ होते थे। संत सरवन दास जी अपने बेटे को देखकर बहुत प्रसन्न होते थे।
जब संत सरवन दास ने दिया उन्हें 'हवाईगर' नाम...
संत निरंजन दास जी के पिता ने अपने पुत्र को संत सरवन दास जी के चरणों में अर्पित करने का निश्चय किया। तब से संत निरंजन दास डेरा में ही रहने लगे और इधर-उधर भाग-दौड़ करते हुए डेरा में सेवा करने लगे। उनके कार्यों को शीघ्रता से करते देख संत सरवन दास जी ने उन्हें "हवाईगर" (तेजतर्रार) नाम दिया। उन्होंने संत सरवन दास जी के चरणों में सेवा करते हुए अपना बचपन बिताया और बाद में संत हरि दास जी और संत गरीब दास जी के साथ सेवा की।
संत निरंजन दास का समाज को योगदान
डेरा बल्लां- संत निरंजन दास के नेतृत्व में डेरा बल्ला' संत सरवन दास चैरिटेबल हॉस्पिटल' चला रहा है। इसके माध्यम से लाखों गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और बेहद किफायती दरों पर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। वहीं, डेरा बल्लां की तरफ से समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए स्कूल और शिक्षण संस्थान स्थापित किए, ताकि वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने रविदासिया समाज और दलित समुदाय के अधिकारों, सम्मान और आत्म-सम्मान के लिए वैश्विक स्तर पर काम किया, जिससे समाज में समानता को बढ़ावा मिला। डेरा बल्लां के माध्यम से उन्होंने धर्म और जाति से ऊपर उठकर मानवता की सेवा का संदेश दिया और समाज में आपसी प्रेम व सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत किया। उन्होंने प्राचीन चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए 'गुरु रविदास आयुर्वेद विश्वविद्यालय' जैसे प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पारंपरिक ज्ञान को नई पहचान मिली।
चुनावी मायने में क्यों खास है दोआबा बेल्ट
दरअसल पंजाब की राजनीति में दोआबा बेल्ट अहम है। इसका कारण है यहां के लोग। जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और नवांशहर बेल्ट से बनी दोआबा बेल्ट के अधिकतर लोगा यूके, कनाड़ा और अमेरिका में रहते हैं। जिसके चलते मतदान में एनआरआई परिवारों का असर भी साफ दिखता है। इसके अलावा यहां का दलित वोट बैंक यहां किसी भी पार्टी की जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाता है। पंजाब में सबसे अधिक एससी अबादी दोआबा में है जो हर चुनाव में मूड़ बदलते रहते हैं। 2017 में जहां की 23 में 15 सीटें कांग्रेस की झोली में गिरी थीं वहीं 2022 के विस चुनावों में आम आदमी पार्टी को 10 तो कांग्रेस को नौ सीटें ही हासिल हुई थी।
इससे पूर्व बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे थे मोदी
इससे पूर्व पीएम नौ सितंबर 2025 को पंजाब में आई बाढ़ के दौरान यहां के दौरे पर आए थे। पीएम ने हिमाचल के साथ-साथ पंजाब का हवाई दौरा किया था। इसके साथ ही उन्होंने गुरदासपुर के सैन्य इलाके में किसानों से मुलाकात की थी। तब उन्होंने पंजाब को वित्तीय सहायता के तौर पर 1600 करोड़ देने का ऐलान किया था।
सुरक्षा में हुई थी चूक
पीएम पांच जनवरी 2022 को जब पंजाब आए थे, तब उनकी सुरक्षा में चूकी हुई थी। पीएम को फिरोजपुर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। लेकिन खराब मौसम के चलते उनका हेलिकॉप्टर नहीं उड़ पाया और वह सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुए। रास्ते में फिरोजपुर जिले के एक फ्लाईओवर पर कुछ किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क जाम कर बैठे थे, जिसके कारण प्रधानमंत्री का काफिला करीब 20 मिनट तक वहीं रुका रहा। यह घटना प्रधानमंत्री की सुरक्षा में गंभीर चूक मानी गई। इस मामले ने देश भर में हंगामा मचा दिया। केंद्र सरकार ने इसे प्रधानमंत्री की जान को खतरे में डालने वाला मामला बताया और पंजाब सरकार से जवाब मांगा। गृह मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए और कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह विफल रही। वहीं, पंजाब सरकार ने कहा कि यह अचानक बने हालात थे और इसमें किसी तरह की साजिश नहीं थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक जांच समिति बनाई गई, जिसमें शीर्ष सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया। जांच के बाद कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही मानी गई। यह मामला केंद्र और पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया। उस दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और सीएम थे चरणजीत सिंह चन्नी।
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