इस संगोष्ठी का उद्देश्य धान की खेती में उभर रही चुनौतियों, खासकर भूजल स्तर का घटना, बढ़ती लागत और खराब मौसम की परिस्थितियों आदि के समाधान ढूंढना और पारंपरिक तरीकों के एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) की संभावनाओं का अध्ययन करना था।
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब राज्य किसान और खेत मजदूर आयोग (पी.एस.एफ.सी.) ने होटल शिवालिक व्यू, चंडीगढ़ में ""पर्यावरण अनुकूल तरीकों से धान की खेती में प्रगति और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा- पंजाब में धान की सीधी बुवाई (डी.एस.आर.) की संभावनाओं को खोलना" विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें टिकाऊ तरीकों से धान की खेती के भविष्य पर विचार-विमर्श करने के लिए विभिन्न विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
इस संगोष्ठी का उद्देश्य धान की खेती में उभर रही चुनौतियों, खासकर भूजल स्तर का घटना, बढ़ती लागत और खराब मौसम की परिस्थितियों आदि के समाधान ढूंढना और पारंपरिक तरीकों के एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) की संभावनाओं का अध्ययन करना था।
इस संगोष्ठी में विशेष अतिथियों के रूप में डॉ. सतबीर सिंह गोसल, वाइस चांसलर, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना; डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वाइस चांसलर, गुरु अंगद देव वेटरनरी और एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना; डॉ. वरिंदर कुमार, रिसर्च डायरेक्टर, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट - साउथ एशिया रिसर्च सेंटर, वाराणसी; डॉ. टी.एन. प्रकाश कमरदी, पूर्व चेयरमैन, कर्नाटक एग्रीकल्चरल प्राइस कमीशन (केएपीसी), बेंगलुरु; डॉ. पुष्पिंदरपाल सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एडब्ल्यूएडीएच, आईआईटी रोपड़; और डॉ. विनय सिंह, प्रतिनिधि, एफएओ संयुक्त राष्ट्र शामिल थे।
विशेषज्ञों ने टिकाऊ तरीकों से धान की खेती, तकनीकी नवाचारों और पानी तथा जलवायु चुनौतियों के समाधान के लिए डीएसआर की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने डीएसआर पर विचार-विमर्श करते हुए इसे अपनाने के फायदों और व्यवहारिक चुनौतियों को उजागर किया। डॉ. कुलविंदर सिंह गिल ने पंजाब राज्य किसान और खेत मजदूर आयोग के साथ एक आगामी सहयोगी प्रोजेक्ट पर प्रकाश डाला जिसका उद्देश्य पराली जलाने के दीर्घकालिक समाधान को विकसित करने के लिए धान के जेनेटिक्स को संशोधित करना है।
डॉ. गुरदेव सिंह खुश ने संगोष्ठी के आयोजन और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने में आयोग के प्रयासों की सराहना की। हरचंद सिंह बरसट ने "पंजाब कृषि, 2026" शीर्षक वाली एक पॉकेट डेटा किताब जारी की, जो आयोग द्वारा एक व्यापक कृषि डेटा बैंक स्थापित करने के उद्देश्य से अपने चल रहे प्रयासों के हिस्से के रूप में तैयार की गई है।
पीएसएफसी के चेयरमैन, प्रो. (डॉ.) सुखपाल सिंह ने पंजाब के कृषि वातावरण खासकर धान के उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर इसके प्रभावों पर केंद्रित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने मौजूदा फसल पैटर्न की स्थिरता, डीएसआर की भूमिका और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को पर्यावरणीय चुनौतियों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता के बारे में महत्वपूर्ण सवाल उठाए, जिसने संगोष्ठी के दौरान केंद्रित विचार-विमर्श के लिए मंच तैयार किया।
संगोष्ठी में डीएसआर को अपनाने के महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हुए चार थीमेटिक पैनल चर्चाएं हुईं। डॉ. मख्खन सिंह भुल्लर, डायरेक्टर ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) की अध्यक्षता में पहले तकनीकी पैनल ने डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट, डायरेक्टर रिसर्च, पीएयू, लुधियाना सहित प्रमुख विशेषज्ञों को एकत्रित किया; जिनमें डॉ. कुलदीप सिंह, पूर्व डायरेक्टर, नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (एनबीपीजीआर) और प्रमुख, जीनबैंक, आईसीआरआईएसएटी, हैदराबाद; डॉ. गोपाल कृष्ण, वैज्ञानिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, रुड़की; डॉ. आशीष, वैज्ञानिक, आईसीएआर-एटीएआरआई, लुधियाना; डॉ. धर्मिंदर भाटिया, प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, पीएयू, लुधियाना; नवीन कुमार, लीड एग्रोनॉमिस्ट, ग्रोइंडिगो, नई दिल्ली; डॉ. जतिंदर सिंह, कृषि अर्थशास्त्री, सीआरआरआईडी, चंडीगढ़; डॉ. वरिंदर कुमार; और डॉ. सतबीर सिंह गोसल, वाइस चांसलर, पीएयू, लुधियाना शामिल थे। पैनल चर्चा के दौरान पंजाब में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हुए भूजल पर बोझ को कम करने और कृषि स्थिरता को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका को उजागर किया गया। माहिरों ने फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए धान की खेती पर निर्भरता कम करने के लिए मूंगफली और कपास जैसे व्यवहारिक विकल्पों पर चर्चा की।
डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने जोर देकर कहा कि पीआर-126 और पीआर-131 जैसी धान की किस्में धान की रोपाई और धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) दोनों के लिए उपयुक्त हैं, जो इन्हें टिकाऊ खेती की दिशा में सुचारू परिवर्तन के लिए व्यवहारिक विकल्प बनाती हैं। डॉ. शैरन एलिजाबेथ बेन्स, मिट्टी और फसल पोषण वैज्ञानिक, कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेज़नो, यूएसए ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) के जरिए मिट्टी और पानी की दक्षता में सुधार के बारे में मूल्यवान विचार साझा किए। डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने वैकल्पिक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि किसानों को धान से वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर प्रेरित करने के लिए अन्य फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य देना आवश्यक है।
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पी.ए.यू.) के राइस ब्रीडिंग इंचार्ज डॉ. राजवीर सिंह गिल के संचालन में आयोजित दूसरे तकनीकी सत्र के दौरान बड़े स्तर पर माहिरों और भागीदारों की भागीदारी देखी गई। पैनलिस्टों में डॉ. जसवीर सिंह गिल, पीएयू, लुधियाना; डॉ. मनिंदर कौर, डॉ. एस.एस. भटनागर यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़; डॉ. अजय राणा, चेयरमैन, फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया; डॉ. अनिल सूद, पूर्व वैज्ञानिक, पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर, लुधियाना; डॉ. जी.एस. बराड़, डायरेक्टर, कृषि और किसान कल्याण, पंजाब; अमृतसर से प्रगतिशील किसान प्रोफेसर राजवीर सिंह सोही; श्री गुरविंदर सिंह बाजवा, डीएसआर वारियर ग्रुप, गुरदासपुर; डॉ. सुरिंदर पाल, डायरेक्टर, भारत मौसम विभाग; और श्री राज किरण जौहरी शामिल थे। सत्र में तकनीकी हस्तक्षेप, पर्यावरणीय प्रभाव और क्रियान्वयन में व्यवहारिक चुनौतियों पर केंद्रित होकर डीएसआर को अपनाने पर विचार-विमर्श किया गया। पैनलिस्टों ने पंजाब भर में डीएसआर को बढ़ाने और इससे संबंधित बाधाओं को दूर करने के लिए नवाचार, संस्थागत समर्थन और भागीदारों के सहयोग की भूमिका को भी उजागर किया।
पंजाब सरकार के सहकारी समितियों के पूर्व रजिस्ट्रार अमरपाल सिंह भुल्लर द्वारा संचालित एक अन्य सत्र आयोजित किया गया, जो कृषि प्रणालियों को मजबूत करने में सहकारी समितियों की भूमिका पर केंद्रित था। पैनल में डॉ. हरजीत सिंह, सहकारिता विभाग, पंजाब; डॉ. सुखविंदर सिंह, कार्यकारी निदेशक, आई.आर.डी.एफ., चंडीगढ़; श्री जसविंदर सिंह सैनी, सीईओ, प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी, होशियारपुर; डॉ. हरप्रीत सिंह, सहायक जनरल मैनेजर, एपीईडीए; श्रीमती कोमल जैसवाल, संस्थापक, ग्रीन अफेयर्स, आई-राइज टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर, आईआईएसईआर चंडीगढ़; और डॉ. विनय सिंह, प्रतिनिधि, संयुक्त राष्ट्र एफएओ शामिल थे। चर्चा के दौरान डीएसआर को प्रोत्साहित करने, खरीद और विपणन प्रणालियों को मजबूत करने तथा किसानों की संस्थागत सहायता तक पहुंच बढ़ाने में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।
पैनलिस्टों ने जोर देकर कहा कि सहकारी-नेतृत्व वाले मॉडल टिकाऊ कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पंजाब राज्य किसान और खेत मजदूर आयोग के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) सुखपाल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समापन सत्र को माननीय श्री कुलतार सिंह संधवां, स्पीकर, पंजाब विधानसभा ने संबोधित किया। सत्र में श्री महिंदर सिंह सिद्धू, चेयरमैन, पनसीड; प्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ श्री देविंदर शर्मा; डॉ. रणजीत सिंह घुम्मन, प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस; और डॉ. टी. एन. प्रकाश कमरदी, पूर्व चेयरमैन, कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग शामिल थे।
वक्ताओं ने पर्यावरणीय और टिकाऊ कृषि प्रथाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर चर्चा की और किसानों के कल्याण के लिए पंजाब राज्य कृषि नीति, 2023 को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने उभरती कृषि चुनौतियों का समाधान करने के लिए हरित क्रांति की तर्ज पर केंद्र सरकार से एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने की भी मांग की।
प्रो. (डॉ.) सुखपाल सिंह ने सभी भागीदारों का उनके मूल्यवान योगदान के लिए धन्यवाद किया और संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी।
सत्र के दौरान, पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भी सभा को संबोधित किया और संगोष्ठी की सराहना की क्योंकि यह केवल सामान्य चर्चा नहीं बल्कि वास्तविक बदलाव लाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने इसे पंजाब के घटते जल संसाधनों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और जोर देते हुए कहा कि राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। श्री गुरु नानक देव जी की विचारधारा का पालन करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने किसानों को तकनीक अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए ‘लैब से जमीन’ के बीच संबंध मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए डीएसआर को अपनाने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग और निर्माण को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर दिया।
डॉ. रणजोध सिंह बैंस, प्रशासनिक अधिकारी-कम-सचिव, पीएसएफसी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को बढ़ावा देने तथा पंजाब की कृषि से संबंधित अन्य पहलों के संबंध में आयोग की आगामी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
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