प्रो. बराड़ ने पंजाबी और हिंदी के साझा भाषाई स्रोतों पर विशेष व्याख्यान दिया विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी मातृभाषाओं में प्रस्तुतियां दीं
प्रो. बराड़ ने पंजाबी और हिंदी के साझा भाषाई स्रोतों पर विशेष व्याख्यान दिया विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी मातृभाषाओं में प्रस्तुतियां दीं
खबर खास, बठिंडा:
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रख्यात भाषाविद् एवं पंजाबी विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र, बठिंडा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बूटा सिंह बराड़ ने पंजाबी और हिंदी भाषाओं के साझा भाषाई स्रोतों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग एवं मातृभाषा उत्सव समिति के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. बूटा सिंह बराड़ के व्याख्यान से हुई। भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भाषा मनुष्य को सामाजिक जीवन से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। विभिन्न शोध स्रोतों के आधार पर उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास क्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उनकी पारस्परिक समानताओं और भिन्नताओं को स्पष्ट किया।
उन्होंने 11वीं–12वीं शताब्दी के साहित्यिक स्रोतों का उल्लेख करते हुए बताया कि उस काल की रचनाओं में पंजाबी और हिंदी दोनों भाषाओं के प्रारंभिक भाषाई तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उपभाषाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उपभाषाओं के परिष्कृत रूपों से ही मानक भाषा का विकास होता है, इसलिए उपभाषाओं और बोलियों का अस्तित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वर्तमान समय में भाषाई विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “अनेकता में एकता” के सिद्धांत को अपनाकर ही मातृभाषा दिवस का उत्सव सार्थक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सीयू पंजाब में देश के विभिन्न राज्यों से अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी मातृभाषाओं में कविता, गीत और भाषण प्रस्तुत कर भारत की भाषाई विविधता की जीवंत झलक प्रस्तुत की। अनेक विद्यार्थियों ने कविता और गीत प्रस्तुत किए, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने अपनी मातृभाषा में विचार व्यक्त कर तथा लोक प्रसंग सुनाकर अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक सुगंध साझा की।
इस अवसर पर मातृभाषा हस्ताक्षर अभियान भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने साझा बैनर पर अपनी-अपनी भाषाओं में हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम ने भाषाई सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक समृद्धि और ‘अनेकता में एकता’ के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
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