दोनों महापुरुष एक ही सामाजिक चेतना की दो कड़ियां, शिक्षा को समाज सुधार का माना आधार, महात्मा फुले का अधूरा काम डा. अंबेडकर ने किया पूरा हरियाणा सिविल सचिवालय परिसर में आयोजित समारोह में की शिरकत
दोनों महापुरुष एक ही सामाजिक चेतना की दो कड़ियां, शिक्षा को समाज सुधार का माना आधार, महात्मा फुले का अधूरा काम डा. अंबेडकर ने किया पूरा हरियाणा सिविल सचिवालय परिसर में आयोजित समारोह में की शिरकत
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प हैं। इसलिए हमें बाबा साहेब के जीवन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता की सीख लेनी और ज्योतिबा फुले के जीवन से समाज सेवा की प्रेरणा लेनी चाहिए।
मुख्यमंत्री हरियाणा सिविल सचिवालय परिसर में कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों द्वारा आयोजित ज्योतिबा फुले एवं बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जंयती समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महापुरुषों के दिखाए रास्ते पर चलते हुए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हरियाणा में डबल इंजन सरकार ने समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू कर गरीब व्यक्ति के उत्थान के लिए काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इन महान विभूतियों के विचारों को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और नीतियों में भी उतार कर शिक्षा में असमानता, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक विषमता जैसी समाजिक चुनौतियां का सामना करना हैं। इन सबका समाधान हमें इन्हीं महापुरुषों के दिखाए मार्ग पर चलने से ही मिलेगा।
सैनी ने कहा कि दोनों महापुरुषों के काम और विचार पर जब भी मंथन करेंगे तो पाएंगे कि महात्मा फुले जो काम अधूरा छोड़ गए थे, उन्हें डा. अंबेडकर ने न केवल आगे बढ़ाया, बल्कि संविधान में प्रावधान करके उसे अंजाम तक पहुंचाया। इस तरह ये दोनों महापुरुष एक ही सामाजिक चेतना की दो कड़ियाँ हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उस वर्ग के उत्थान में लगाया, जिसे सदियों तक उपेक्षित और वंचित रखा गया। इसलिए इन दोनों को ही दबे-कुचले अवाम की आवाज कहा जाता है। महात्मा ज्योतिबा फुले जी ने 19वीं शताब्दी में छुआछूत, अज्ञानता और अंधविश्वास का अंधकार मिटाने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने न केवल स्वयं शिक्षित होने का मार्ग अपनाया, बल्कि समाज में महिलाओं और उपेक्षित वर्ग को भी शिक्षा से जोड़ने का महान कार्य किया। ज्योतिबा फुले ने अपनी पत्नी श्रीमती सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर भारत का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।
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