हरियाणा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएफडीसी) के निदेशक मंडल की 146वीं बैठक में लिया गया निर्णय
हरियाणा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएफडीसी) के निदेशक मंडल की 146वीं बैठक में लिया गया निर्णय
खबर खास, चंडीगढ़ :
अब किसान अपने खेतों में खड़े एग्रोफॉरेस्ट्री प्रजातियों के पेड़ों, जैसे यूकेलिप्टस, पॉपलर आदि को एचएफडीसी के ई-नीलामी पोर्टल के माध्यम से बेच सकेंगे, जिससे उन्हें बिचौलियों से अधिक कीमत मिल सकेगी। राज्य के किसानों के हित में यह निर्णय हरियाणा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचएफडीसी) के निदेशक मंडल की 146वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं एचएफडीसी अध्यक्ष सुधीर राजपाल ने की।
बैठक के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध निदेशक केसी मीणा ने यह प्रस्ताव रखा। योजना के अनुसार, जो किसान एचएफडीसी के ई-नीलामी पोर्टल का उपयोग करना चाहते हैं, वे संबंधित जनरल मैनेजर को आवेदन देंगे। इसके बाद कॉर्पोरेशन के फील्ड कार्यालय खड़े पेड़ों का आंकलन और मार्किंग करेंगे तथा उनके वॉल्यूम के आधार पर एक आरक्षित मूल्य तय किया जाएगा। किसान चाहें तो अपना आरक्षित मूल्य स्वयं भी निर्धारित कर सकते हैं।
इसके बाद पेड़ों के वॉल्यूम को ई-नीलामी पोर्टल पर डाला जाएगा। नीलामी में प्राप्त बोली की जानकारी किसान को दी जाएगी, और यदि किसान उस मूल्य से सहमत होता है, तो एचएफडीसी कुल नीलामी मूल्य का मात्र 5 प्रतिशत सेवा शुल्क लेगा और शेष राशि सीधे किसान के खाते में ऑनलाइन जमा कर दी जाएगी। यह योजना संस्थानों के लिए भी खुली होगी, लेकिन संस्थानों से 10 प्रतिशत सेवा शुल्क लिया जाएगा।
सुधीर राजपाल ने बताया कि सरकार का मकसद है कि किसानों को उनके उत्पादों का अधिक से अधिक मूल्य मिले, इसलिए इस ई-नीलामी प्रणाली के माध्यम से किसानों और संस्थानों को अपने खड़े पेड़ों की बिक्री के लिए बेहतर मूल्य मिलने, बिचैलियों की भूमिका समाप्त होने, पारदर्शिता बढ़ने और अधिक खरीदारों तक पहुंच बनने की उम्मीद है। किसानों और संस्थानों के वित्तीय हितों की सुरक्षा के लिए एचएफडीसी ने पूरी प्रक्रिया के लिए नियम भी तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से किसानों की आय में लगभग 25 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना है।
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