पश्चिम बंगाल–असम में जीत के बाद अब नशा विरोधी अभियान के साथ पंजाब में सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी
पश्चिम बंगाल–असम में जीत के बाद अब नशा विरोधी अभियान के साथ पंजाब में सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी
खबर खास | चंडीगढ़
पश्चिम बंगाल और असम में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव पर पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है। पार्टी ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लंबी रणनीति तैयार की है, जिसमें संगठन विस्तार और बड़े जनसंपर्क अभियान शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में हर महीने दौरा करेंगे, ताकि जमीनी स्तर पर पार्टी को सक्रिय और संगठित किया जा सके।
भाजपा की रणनीति में इस बार सबसे बड़ा फोकस नशे के मुद्दे पर रहने वाला है। पार्टी राज्यभर में एक व्यापक नशा विरोधी जन-जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी में है, जिसे राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर प्रभावी बनाने की योजना है। माना जा रहा है कि पंजाब में नशे का मुद्दा आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है और भाजपा इसे एक बड़े चुनावी नैरेटिव के रूप में स्थापित करना चाहती है।
इस अभियान की शुरुआत पहले ही मोगा में हुई एक बड़ी रैली से हो चुकी है, जहां अमित शाह ने साफ संकेत दिए थे कि भाजपा पंजाब की राजनीति में बदलाव लाने के मिशन के साथ आगे बढ़ रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि लगातार दौरे, स्थानीय नेताओं की सक्रियता और मुद्दा-आधारित राजनीति के जरिए भाजपा राज्य में अपनी मौजूदगी को नए स्तर तक ले जा सकती है।
पार्टी के भीतर की रणनीति पर नजर डालें तो यह भी सामने आया है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल में अमित शाह ने बेहद गहन तरीके से चुनावी तैयारियों की निगरानी की थी। करीब 15 दिनों तक राज्य में रहकर उन्होंने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर काम किया, जिसमें “वार रूम” जैसी रणनीति अपनाई गई। देर रात तक चलने वाली बैठकों और क्षेत्रवार योजनाओं के जरिए बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय किया गया।
अब इसी मॉडल को पंजाब में लागू करने की तैयारी है, जिससे भाजपा 2027 के चुनाव में मजबूत दावेदारी पेश कर सके।
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