SCERT ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित PSTET 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इसमें बड़ी संख्या में इन-सर्विस शिक्षकों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है।
SCERT ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित PSTET 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इसमें बड़ी संख्या में इन-सर्विस शिक्षकों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है।
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) ने पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षा में शामिल हुए शिक्षक अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट PSTET Result Portal पर देख सकते हैं।
SCERT ने यह परीक्षा 26 अप्रैल को केवल पंजाब के इन-सर्विस शिक्षकों के लिए आयोजित की थी। यह परीक्षा शिक्षकों की प्रमोशन से जुड़ी नई पात्रता शर्तों के तहत करवाई गई थी।
करीब 22,000 प्राइमरी शिक्षकों ने PSTET-1 में हिस्सा लिया। वहीं PSTET-2 में विषयवार भागीदारी इस प्रकार रही— 450 आर्ट्स एंड क्राफ्ट शिक्षक, 129 होम साइंस शिक्षक, 5,151 गणित एवं विज्ञान शिक्षक, 181 संगीत शिक्षक, 2,054 शारीरिक शिक्षा शिक्षक, 12 संस्कृत शिक्षक, 16,825 सामाजिक अध्ययन शिक्षक, 343 विशेष शिक्षक और 9 उर्दू शिक्षक शामिल रहे।
अधिकांश शिक्षक हुए सफल
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने इस परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया था, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि असफल होने पर उनकी पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। लेकिन SCERT द्वारा जारी परिणाम के अनुसार अधिकांश शिक्षकों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। केवल वे शिक्षक असफल माने गए हैं जिन्होंने परीक्षा में भाग ही नहीं लिया।
PSTET पासिंग क्राइटेरिया
SCERT ने PSTET-1 प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए आयोजित की, जबकि PSTET-2 मिडिल स्कूल शिक्षकों के लिए विषयवार करवाई गई। परिणाम भी विषयवार जारी किया गया है।
सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 60 प्रतिशत अंक यानी 150 में से 90 अंक प्राप्त करना अनिवार्य था। वहीं SC, OBC और अन्य आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 55 प्रतिशत यानी 82 अंक आवश्यक थे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा अनिवार्य
पंजाब सरकार ने यह नियम सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के आधार पर लागू किया है। आदेश के अनुसार अब इन-सर्विस शिक्षकों को प्रमोशन के लिए PSTET पास करना अनिवार्य है।
हालांकि शिक्षकों का कहना है कि सेवा में रहते हुए अनुभवी शिक्षकों पर ऐसी परीक्षा थोपना उनके करियर के लिए अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल उन शिक्षकों को छूट दी है जिनकी रिटायरमेंट में पाँच वर्ष से कम समय बचा है।
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