नशे के खिलाफ एकजुट होकर समाज को जागरूक करेंः कविंद्र गुप्ता राज्यपाल ने समृद्ध समाज के निर्माण के लिए दिए पांच संकल्प
नशे के खिलाफ एकजुट होकर समाज को जागरूक करेंः कविंद्र गुप्ता राज्यपाल ने समृद्ध समाज के निर्माण के लिए दिए पांच संकल्प
खबर खास, शिमला :
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा समृद्ध समाज के निर्माण के लिए नशामुक्ति, संस्कार, सदाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीयता के पांच संकल्पों को अपनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल देर सायं शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में मातृवंदना संस्थान द्वारा आयोजित मातृवन्दना मासिक पत्रिका के विशेषांक ‘पंच संकल्प से समाज परिवर्तन’ के लोकार्पण अवसर पर बोल रहे थे। उन्होेेेेंने इस अवसर पर, संस्थान की दिनदर्शिका का विमोचन भी किया। उन्होंने मातृवन्दना पत्रिका सदस्य की ऑनलाईन एप का शुभारम्भ भी किया।
श्री कविंद्र गुप्ता ने देवभूमि में बढ़ते नशे पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा ‘‘आज प्रदेश में नशे के बढ़ते अवैध धंधे को लेकर हम सभी को चिंतित होने की आवश्यकता है। जहाँ हमें अपनी युवा पीढ़ी को नशे जैसी बुराई से बचाना है, वहीं दूसरी ओर हमें देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।’’ उन्होंने कहा कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध एकजुट होकर कार्य करें और समाज में जागरूकता फैलाएँ।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल देवभूमि है, जहां का प्रत्येक जनपद अपनी विशिष्ट देव-परंपरा, आस्था और संस्कृति के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यही आध्यात्मिक शक्ति समाज को जोड़ने, संस्कृति के संरक्षण और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी ईमानदारी से कार्य करने की प्रेरणा देती है। यह शक्ति हमें सदैव आगे बढ़ने और समाज के कल्याण के लिए कार्य करने का मार्ग दिखाती है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें अनुशासन, नैतिकता, सेवा और सहयोग जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
उन्होंने संस्थान द्वारा मातृवंदना के नियमित प्रकाशन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से किए जा रहे लेखन और समाज सेवा के यह प्रयास वास्तव में प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि पत्र-पत्रिकाएँ केवल सूचनाएँ और ज्ञान प्रदान करने का माध्यम ही नहीं होतीं, बल्कि वे समाज के विचारों और मूल्यों को दिशा देने का एक सशक्त माध्यम भी होती हैं। उन्होंने कहा कि सम-सामयिक विषयों पर सारगर्भित लेखों के माध्यम से वे पाठकों के ज्ञान का विस्तार करती हैं और साथ ही हमारी समृद्ध संस्कृति तथा गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराकर उनमें राष्ट्रीयता, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ बनाती हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि मातृवंदना का यह विशेषांक संकल्प, अनुशासन, नैतिकता, सेवा और सहयोग जैसे मूल्यों को समाज में स्थापित करने और जनमानस को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
इस अवसर पर, मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय प्रचार टोली सदस्य श्री प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति सनातन है, जिसके कारण इसकी सांस्कृतिक चेतना सदैव अक्षुण्ण बनी रही है। उन्होंने मातृवंदना पत्रिका की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके प्रथम अंक का विमोचन अप्रैल 1995 में मंडी जिले से हुआ। वर्ष 1997 से इसका नियमित प्रकाशन शिमला से प्रारंभ हुआ। आज यह पत्रिका हिमाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों सहित 11 हजार से अधिक गांवों तक पहुंचकर समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में सबसे अधिक औसत सदस्यता हिमाचल प्रदेश में होना गर्व का विषय है।
इससे पूर्व, राज्यपाल ने मातृवंदना पत्रिका के पूर्व संस्थापक संपादक एवं संस्कृत के विद्वान डा दयानंद शर्मा को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर, पत्रिका के संपादक डॉ कर्म सिंह ने पत्रिका के इतिहास एवं प्रकाशन यात्रा पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में साई एटर्नल फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य राजकुमार वर्मा तथा मातृवंदना संस्थान के अध्यक्ष डॉ उमेश मौदगिल भी उपस्थित थे।
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