कहा, लगभग 90 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी निकलीं, कुछ वैध वर्कस्लिप वाले श्रमिकों को कराना होगा नया पंजीकरण वर्क स्लिप अनियमितताओं पर सख्ती, हर जिले में बनेगी ग्रीवेंस कमेटी
कहा, लगभग 90 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी निकलीं, कुछ वैध वर्कस्लिप वाले श्रमिकों को कराना होगा नया पंजीकरण वर्क स्लिप अनियमितताओं पर सख्ती, हर जिले में बनेगी ग्रीवेंस कमेटी
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में वर्कस्लिप (90 दिन कार्य रसीद) से जुड़ी अनियमितताओं की जांच में वैध पाई गई वर्क स्लिप के श्रमिकों को बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले लाभों के लिए जल्द आईडी एक्टिवेट/पोर्टल खोल दिया जाएगा जिनका डाटा सही/असली पाया गया है क्योंकि सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को भेजे गए प्रस्ताव के संबंध में मंजूरी/सिफारिशें प्राप्त हो चुकी है।
विज ने बताया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को उनके द्वारा भेजा गया था, और इस प्रस्ताव के संबंध में मंजूरी/सिफारिशें उच्च स्तरीय समिति द्वारा प्रदान कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि इस उच्च स्तरीय समिति में विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के महानिदेशक श्री राजीव रत्तन, अंबाला के आईजी श्री पंकज नैन और वास्तुकला विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल हैं।
विज ने बताया कि इस उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के अनुसार हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा जिला स्तर पर एक ग्रीवेंस कमेटी का गठन भी किया जाएगा ताकि श्रमिकों की समस्याओं का निदान किया जा सकें।
श्रम मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति ने यह भी कहा है कि जिन श्रमिकों के पास कुछ वैध वर्क स्लिप हैं, उनका नया पंजीकरण किया जाएगा और अगर वेरिफ़िकेशन के बाद ऐसे श्रमिक रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र पाए जाते हैं, तो पात्रता के अनुसार उन्हें लंबित लाभ भी दिए जाएंगे। श्री विज बताया कि उनके द्वारा हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में वर्कस्लिप (90 दिन कार्य रसीद) से जुड़ी अनियमितताओं कि जांच के लिए गठित की गई 22 जिलों की कमिटियों से रिपोर्ट प्राप्त हुई थी जिसमें लगभग 90 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी पाई गई।
उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की सतर्कता और पैनी निगाह के चलते गत दिनों श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में लंबे समय से चली आ रही वर्कस्लिप (कार्य रसीद) से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा गया था और प्रारंभिक जांच में यह घोटाला लगभग संभवतः 1500 करोड़ रूपए तक का होने की आशंका जताई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री विज ने इस पूरे प्रकरण की किसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी से गहन जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा गया था जिस पर सरकार ने फर्जी वर्करों को दी गई राशि की व्यापक रिपोर्ट देने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करने के निर्देश दिए थे।
विज ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर तीन जिलों हिसार, कैथल और जींद में जांच कराई गई, जहां बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। इसके पश्चात श्रम मंत्री अनिल विज द्वारा राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया, जिनमें श्रम विभाग के अधिकारी सहित तीन अन्य अधिकारी शामिल किए गए। इन समितियों द्वारा ऑनलाइन वर्कस्लिपों का भौतिक सत्यापन किया गया है और कुल 90 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी पाई गई। जिनमें कुल 2178523 वर्कस्लिपों में केवल 270945 वर्कस्लिप सही पाई गई है जबकि 1907578 वर्कस्लिप फर्जी पाई गई है।
फिलहाल राज्य के 22 जिलों में पिछले दो साल तक की अवधि की जांच कराई गई थी जबकि हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के द्वारा ये योजना लाभ वर्ष 2008 से संचालित है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से संचालित योजनाओं का लाभ लेने वाले श्रमिकों के वर्क स्लीपों की भी जांच की जा सकती है जोकि अभी दो साल अवधि का अनुमानित 1500 करोड़ रूपये का घोटाला की राशि और अधिक होने की संभावना है जोकि हजारों करोड़ रूपये के घोटाला हो सकता है। श्री विज ने बताया कि जांच में दोषी पाए जाने वालों को सज़ा देने पर भी विचार किया जा रहा है।
विज ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि कई स्थानों पर गांव- गांव/ शहर-शहर में फर्जी पंजीकरण कर वर्कस्लिपें बनाई गईं, ताकि अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। एक श्रमिक को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से औसतन 2.5 लाख रूपए तक का लाभ दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी वित्तीय क्षति होने की संभावना है। श्रम मंत्री ने कहा कि “जो पात्र नहीं हैं, वे योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। यह सीधी-सीधी लूट है और सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये की आर्थिक हानि पहुंचाई जा रही है।”
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