अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस अभियान के दौरान प्रदेश में कुल 99 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस अभियान के दौरान प्रदेश में कुल 99 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए।
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि हरियाणा में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्यभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत जमीनी स्तर पर व्यापक गतिविधियां आयोजित की गईं और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान प्रदेश में कुल 99 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 4,251 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें 370 बच्चे (0–14 वर्ष), 1,469 वयस्क पुरुष, 1,564 महिलाएं तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के 848 बुजुर्ग शामिल रहे। इसके साथ ही 106 हेल्थ टॉक्स, सेमिनार, कार्यशालाएं एवं जन-व्याख्यान आयोजित किए गए। इस अभियान में 40 शैक्षणिक संस्थानों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इसके अतिरिक्त, विभिन्न जिलों में योग सत्रों के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी जागरूकता अभियान चलाया गया।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य शिविरों में गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया। जांच के दौरान 231 लोगों में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और 165 में मधुमेह (डायबिटीज) की पहचान हुई। 326 लोगों को मोटापे के जोखिम का खतरा, जबकि 75 लोग क्रॉनिक श्वसन रोगों से प्रभावित पाए गए। इसके अलावा, 3 व्यक्तियों में कैंसर या प्री-कैंसर के लक्षण संदिग्ध पाए गए और 64 लोगों को एनसीडी/एमसीएच देखभाल संबंधी परामर्श प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में जिला स्तर पर कैथल सबसे सक्रिय रहा, जहां 28 स्वास्थ्य शिविरों में 921 लोगों की जांच की गई और 40 हाइपरटेंशन तथा 51 डायबिटीज के मामले सामने आए। रोहतक में 8 शिविरों में 170 लोग, फरीदाबाद में 3 शिविरों में 169 लोग और यमुनानगर में 9 शिविरों में 376 लोगों की जांच की गई, जहां लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य शिविरों के अलावा, जिलों में सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, होर्डिंग्स, सोशल मीडिया तथा आशा वर्कर्स और स्वास्थ्य कर्मचारियों के माध्यम से लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। कई जिलों में युवा संगठनों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई, जिससे यह संदेश सुदृढ़ हुआ कि स्वास्थ्य जागरूकता सभी की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभियान में ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया, जिसके तहत मानव स्वास्थ्य को पशु, पौधों और पर्यावरण के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया। हरियाणा सरकार पर्यावरण स्वच्छता और पशु स्वास्थ्य को भी अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल कर रही है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ हरियाणा, स्वस्थ भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं, जिसमें समाज, संस्थान और सरकार मिलकर कार्य करें और हर कदम पर विज्ञान को मार्गदर्शक बनाया जाए।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष की वैश्विक थीम “Together for Health, Stand with Science” के अनुरूप कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य संबंधी गलत जानकारी से लड़ना भी उतना ही जरूरी है जितना बीमारियों से लड़ना है। उन्होंने बताया कि आज “मोबाइल फोन पर साझा की गई एक गलत स्वास्थ्य जानकारी जमीनी स्तर पर किए गए महीनों के प्रयासों को प्रभावित कर सकती है। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा जहाँ लोग विज्ञान पर भरोसा करें, मिथकों पर सवाल उठाएं और अपने स्वास्थ्य के बारे में सोच-समझकर निर्णय लें।"
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