सात साल पहले हुई थी उम्रकैद, तीन अन्य की सजा बरकरार
सात साल पहले हुई थी उम्रकैद, तीन अन्य की सजा बरकरार
खबर खास, चंडीगढ़ :
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्च सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को बरी कर दिया है। अदालत ने हालांकि तीन आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा को बरकरार रखा है। अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड में राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। जिस वजह से राम रहीम को बरी कर दिया गया।
गौर रहे कि इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला की स्पेशल सीबीआई अदालत ने राम रहीम समेत बाकी सभी आरोपियों को सात साल कैद की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
इससे पहले डेरा मैनेजर रणजीत हत्याकांड़ में भी राम रहीम को हाईकोर्ट बरी कर चुका है। हालांकि सीबीआई ने इसे चुनौती दी हुई है। लेकिन राम रहीम को अभी जेल में ही रहना होगा क्योंकि साध्वियों के यौन शोषण मामले में राम रहीम को 10 साल कैद की सजा हुई थी।
गौर रहे कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद वर्ष 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसको लेकर खूब बवाल मचा तो मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद मामले में डेरा मुखी सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
यह कहा हाईकोर्ट ने
हाईकोर्ट ने कहा कि सबूतों का अभाव हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से बहस की गई। मगर, अदालत ने सबूतों को नाकाफी ठहरा दिया। वहीं, कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ उपलब्ध सबूत और गवाह से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया।
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