साँस फूलने की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज : सुबह भिगोए हुए अंजीर खाने से सांस की समस्या में राहत और फेफड़ों की सेहत में सुधार
साँस फूलने की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज : सुबह भिगोए हुए अंजीर खाने से सांस की समस्या में राहत और फेफड़ों की सेहत में सुधार
ख़बर ख़ास, सेहत :
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता प्रदूषण, धूल-मिट्टी और बदलती जीवनशैली के कारण सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और जल्दी हांफने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। कई लोग अस्थमा, एलर्जी या कमजोर फेफड़ों के कारण इस परेशानी से जूझते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में बताए गए कुछ प्राकृतिक उपाय सांस संबंधी समस्याओं में काफी मददगार माने जाते हैं। इन्हीं में से एक असरदार उपाय है सुबह खाली पेट भिगोए हुए अंजीर का सेवन।
आयुर्वेद के अनुसार अंजीर को पौष्टिक, बलवर्धक और फेफड़ों के लिए लाभकारी फल माना गया है। इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं। खासतौर पर सांस फूलने की समस्या में अंजीर फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर करने में सहायक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रात को 2 से 3 सूखे अंजीर एक गिलास साफ पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इन्हें अच्छी तरह चबाकर खाएं। इसके बाद अंजीर का पानी भी पी लें। ऐसा नियमित रूप से करने से बलगम की समस्या कम होती है, सांस की नलियां साफ होती हैं और सांस लेने में होने वाली तकलीफ में धीरे-धीरे राहत महसूस होने लगती है।
अंजीर का सेवन खांसी, गले की खराश और छाती में जमे कफ को बाहर निकालने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, जिससे शरीर में विषैले तत्व जमा नहीं होते और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। मजबूत इम्युनिटी सांस संबंधी बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाती है।
हालांकि, यह एक घरेलू और सहायक उपाय है। अगर सांस लेने की समस्या गंभीर है या लंबे समय से बनी हुई है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दवाइयों के साथ-साथ सही खान-पान, नियमित योग और प्राणायाम अपनाकर भी फेफड़ों को स्वस्थ रखा जा सकता है। आयुर्वेदिक उपायों को दिनचर्या में शामिल कर सांस की समस्या से प्राकृतिक तरीके से राहत पाई जा सकती है।
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