इस सत्र में निवेश के अवसरों, सतत विकास की दिशा में परिवर्तन और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
इस सत्र में निवेश के अवसरों, सतत विकास की दिशा में परिवर्तन और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब सरकार ने आज प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट 2026 के अंतर्गत “टेक्सटाइल, स्पिनिंग और वीविंग” विषय पर एक विशेष क्षेत्रीय सत्र का आयोजन किया, जिसमें राज्य की यार्न, निटवियर, वूलन और उभरते टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्रों में स्थापित मजबूती को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस सत्र में निवेश के अवसरों, सतत विकास की दिशा में परिवर्तन और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इसके साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि पंजाब भारत की टेक्सटाइल वैल्यू चेन में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है और आधुनिक, प्रौद्योगिकी आधारित तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उद्योग के साथ साझेदारी के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस सत्र में पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा, पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की निदेशक सुरभि मलिक (आईएएस) उपस्थित रहे।
पैनल चर्चा में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रदीप कुमार मार्कंडेय (सीईओ – प्रोजेक्ट्स, ट्राइडेंट ग्रुप), अमित जैन (प्रबंध निदेशक, शिंगोरा टेक्सटाइल्स) और सिद्धार्थ खन्ना (कार्यकारी निदेशक, अरिसुदाना इंडस्ट्रीज) शामिल थे।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने पंजाब के टेक्सटाइल क्षेत्र के अगले विकास चरण को आकार देने वाले तीन प्रमुख पहलुओं पर विशेष जोर दिया।
पहला, बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता का निर्माण आवश्यक है, ताकि वैश्विक खरीदारों को आकर्षित किया जा सके, पैमाने की अर्थव्यवस्था प्राप्त की जा सके और भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को वैश्विक विनिर्माण केंद्रों के मुकाबले मजबूत बनाया जा सके।
दूसरा, उन्नत तकनीकों को तेजी से अपनाना—जैसे एआई और मशीन लर्निंग आधारित मशीनरी, डिजिटाइज्ड उत्पादन प्रणाली और एकीकृत सप्लाई चेन—उत्पादकता, गुणवत्ता और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तीसरा, भविष्य के विकास की आधारशिला सतत विकास होना चाहिए, जिसमें जल के चक्रीय उपयोग, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जे एल डी ) प्रणालियों, ऊर्जा संरक्षण और कृषि आधारित बायोमास जैसे वैकल्पिक ईंधनों की ओर संक्रमण पर विशेष ध्यान दिया जाए। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को ब्रांडिंग, विशिष्ट उत्पाद श्रृंखलाओं और टेक्निकल टेक्सटाइल्स में विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि वे मात्रा के बजाय मूल्य के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
प्रतिभागियों ने भारत में फाइबर उत्पादन क्षमता की कमी को दूर करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण अवसरों की ओर संकेत किया, विशेष रूप से रिसाइकल्ड फाइबर के क्षेत्र में, जो डाउनस्ट्रीम निवेश को बढ़ावा देने और घरेलू टेक्सटाइल वैल्यू चेन को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
सत्र के दौरान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की निदेशक सुरभि मलिक ने औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति (आईबीडीपी) 2026 के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों की जानकारी दी। इस नीति के तहत 10 से 15 वर्षों की लचीली प्रोत्साहन वितरण अवधि, स्थिर पूंजी निवेश पर 20 प्रतिशत तक की पूंजी सब्सिडी (अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक), बिजली शुल्क से 100 प्रतिशत छूट तथा कुल प्रोत्साहन स्थिर पूंजी निवेश के 125 प्रतिशत तक (अधिकतम 500 करोड़ रुपये) प्रदान किए जाएंगे। 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाली मेगा इकाइयों को अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज का लाभ मिलेगा।
इस नीति को मजबूत गैर-वित्तीय सुविधाओं का भी समर्थन प्राप्त है, जिनमें राइट टू बिजनेस एक्ट के अंतर्गत समयबद्ध स्वीकृतियां, फास्टट्रैक पंजाब सिंगल-विंडो प्रणाली के माध्यम से सुविधा, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और अनुमोदित लोड के 125 प्रतिशत तक कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की अनुमति शामिल है।
इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने राज्य में स्थिर और उद्योग-अनुकूल वातावरण बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें प्रभावी प्रोत्साहन वितरण और मजबूत बुनियादी ढांचा प्रमुख आधार हैं। वहीं मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा ने कपास, स्पिनिंग और मूल्य-वर्धित टेक्सटाइल क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। निदेशक उद्योग एवं वाणिज्य सुरभि मलिक ने राज्य के स्थापित टेक्सटाइल क्लस्टर, कुशल श्रमिक बल और मजबूत लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को पंजाब की प्रमुख ताकत बताया।
सत्र से प्राप्त प्रमुख सुझावों में उद्योग द्वारा साझा और किफायती पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे—विशेष रूप से क्लस्टर स्तर पर ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेड़ एल डी ) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सी ई टी पी ) प्रणालियों—की स्थापना की आवश्यकता, फाइबर उत्पादन क्षमता के विस्तार, किफायती और टिकाऊ समाधान विकसित करने के लिए उद्योग एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा 24×7 विनिर्माण संचालन के समर्थन के लिए स्थिर टैरिफ व्यवस्था की मांग शामिल रही।
राज्य सरकार ने बताया कि आगे की कार्यवाही फास्टट्रैक पंजाब सिंगल-विंडो प्रणाली के माध्यम से की जाएगी और आने वाले सप्ताहों में औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति (आईबीडीपी) 2026 के अंतर्गत ठोस प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए लक्षित परामर्श बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
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