कांग्रेस ने डीए भुगतान में देरी पर उठाए सवाल, कर्ज और विज्ञापन खर्च को लेकर आप सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस ने डीए भुगतान में देरी पर उठाए सवाल, कर्ज और विज्ञापन खर्च को लेकर आप सरकार पर साधा निशाना
ख़बर ख़ास | चंडीगढ़
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर सियासत तेज हो गई है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया गया। यह याचिका 30 जून तक कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए भुगतान के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।
वड़िंग ने कहा कि डीए कोई एहसान नहीं बल्कि कर्मचारियों और पेंशनरों का वैध अधिकार है। उन्होंने हैरानी जताई कि राज्य सरकार इस भुगतान को लेकर इतना कड़ा रुख क्यों अपना रही है और अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है।
कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि राज्य सरकार ने पिछले डेढ़ महीने में करीब 5,300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इसके बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया डीए का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
वड़िंग ने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापन और प्रचार पर भारी खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने प्रचार के लिए कर्ज ले सकती है, तो कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, यह सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं दोनों को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2022 में राज्य पर लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार को अपने वित्तीय प्रबंधन पर पुनर्विचार करना चाहिए।
वड़िंग ने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका बकाया डीए भुगतान करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ऐसा करने में विफल रहती है, तो आने वाले महीनों में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनावों के बाद यदि कांग्रेस की सरकार बनती है, तो डीए के बकाया भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।
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