विभाग के इंटरवेंशंस डिज़ाइन एंड इफेक्ट्स लैब (आईडीईएल) से उत्पन्न शोध कार्य “कैंसर मिसइन्फॉर्मेशन इन द डिजिटल एज: ए ग्लोबल सिंथेसिस ऑफ रिसर्च ट्रेंड्स एंड की थीम्स” को फ्रांस के लियोन शहर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित आईएआरसी@60 सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चुना गया है।
खबर खास, बठिंडा :
भारतीय सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब), बठिंडा के शोध कार्य को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की विशेष कैंसर एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया है।
मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया स्टडीज़ विभाग के इंटरवेंशंस डिज़ाइन एंड इफेक्ट्स लैब (आईडीईएल) से उत्पन्न शोध कार्य “कैंसर मिसइन्फॉर्मेशन इन द डिजिटल एज: ए ग्लोबल सिंथेसिस ऑफ रिसर्च ट्रेंड्स एंड की थीम्स” को फ्रांस के लियोन शहर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित आईएआरसी@60 सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह दर्शाती है कि सीयू पंजाब वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
वैज्ञानिक मूल्यांकन की कठिन प्रक्रिया में सफलता: इस शोध की स्वीकृति विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसके लिए साइंटिफिक कंसेंसस रिव्यू की कठोर प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसे वैश्विक अकादमिक जगत में सबसे कठिन मूल्यांकन प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। पारंपरिक पीयर-रिव्यू के विपरीत, इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑन्कोलॉजिस्ट, महामारी वैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों का पैनल शोध की पद्धति, आंकड़ों की विश्वसनीयता और नीतिगत महत्व पर सामूहिक सहमति बनाता है।
आईडीईएल टीम ने इस कठिन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर यह सिद्ध किया है कि कैंसर से संबंधित गलत सूचनाओं (इन्फोडेमिक) से निपटने के लिए उनका अंतरविषयी दृष्टिकोण वैश्विक मानकों पर खरा उतरता है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की “रिसर्च फॉर रिसर्जेंट पंजाब” की अवधारणा को भी सशक्त बनाती है, जो जनसंचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच प्रभावी सेतु का कार्य कर रही है।
कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शोध को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रो. तिवारी ने कहा कि “यह उपलब्धि हमारे शोध दृष्टिकोण की पुष्टि करती है। आईएआरसी की वैज्ञानिक समीक्षा प्रक्रिया को पार करना इस बात का प्रमाण है कि सीयू पंजाब केवल शोध पत्र प्रकाशित नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी योगदान दे रहा है। हमें गर्व है कि हमारे शोधार्थियों ने पंजाब को वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर स्थापित किया है।”
यह परियोजना मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया स्टडीज़ विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रूबल कनोज़िया के नेतृत्व में संचालित की जा रही है। उनके मार्गदर्शन में आईडीईएल लैब कैंसर से संबंधित गलत सूचनाओं के विरुद्ध साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप विकसित करने के उद्देश्य से शोध कार्य कर रही है।
इस शोध में मुख्य योगदान पीएचडी शोधार्थी नमन का है, जिनका कैंसर मिसइन्फॉर्मेशन पर चल रहा शोध अब विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों द्वारा परखा और स्वीकार किया गया है। उनके साथ शोधार्थी ऋतु आर्या ने भी इस अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके द्वारा किए गए विश्लेषण को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए उपयोगी उपकरण के रूप में मान्यता मिली है। इस उपलब्धि में आईडीईएल लैब के अन्य सदस्यों रॉबिन जिंदल, रागेंदु आर और रक्तिमा गुप्ता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिनके सहयोग और समन्वय ने इस शोध को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
आईएआरसी की कठोर वैज्ञानिक समीक्षा प्रक्रिया से गुजरने के बाद आईडीईएल के निष्कर्ष अब आईएआरसी, डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य साक्षरता से जुड़ी नीतियों के विकास में योगदान देने की दिशा में अग्रसर हैं। यह उपलब्धि दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य संचार और इन्फोडेमियोलॉजी अध्ययन के क्षेत्र में सीयू पंजाब को एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करती है तथा यह दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सामाजिक विज्ञान की भूमिका भी चिकित्सा विज्ञान जितनी ही महत्वपूर्ण है।
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