सिंथआईडी जल्द ही यूज़र्स को गूगल खोज और क्रोम पर सीधे यह पहचानने में मदद करेगा कि फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई द्वारा बनाया गया है या नहीं। सुंदर पिचाई का कहना है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के तेजी से फैलने के बीच पारदर्शिता (पारदर्शिता) बेहद जरूरी है।
सिंथआईडी जल्द ही यूज़र्स को गूगल खोज और क्रोम पर सीधे यह पहचानने में मदद करेगा कि फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई द्वारा बनाया गया है या नहीं। सुंदर पिचाई का कहना है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के तेजी से फैलने के बीच पारदर्शिता (पारदर्शिता) बेहद जरूरी है।
खबर खास | नई दिल्ली
जैसे-जैसे एआई -जनरेटेड कंटेंट इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है, गूगल ने अपनी एआई डिटेक्शन तकनीक सिंथआईडी के बड़े विस्तार की घोषणा की है, ताकि यूज़र्स यह पता लगा सकें कि कोई इमेज, वीडियो या ऑडियो क्लिप असली है या एआई द्वारा बनाई गई है।
यह टूल गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक। द्वारा विकसित किया गया है। पहले यह केवल मिथुन एआई ऐप तक सीमित था, लेकिन अब कंपनी ने पुष्टि की है कि सिंथआईडी को जल्द ही गूगल Search और Chrome ब्राउज़र में भी शामिल किया जाएगा।
इस घोषणा की जानकारी Sundar Pichai ने कैलिफ़ोर्निया में आयोजित गूगल के वार्षिक I/O इवेंट के दौरान दी। पिचाई ने कहा कि आज के समय में, जब AI-जनरेटेड कंटेंट तेजी से इंटरनेट पर फैल रहा है, पारदर्शिता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
इवेंट के दौरान पिचाई ने एक वायरल AI-जनरेटेड इमेज भी दिखाई, जिसमें वह एलोन मस्क, जेन्सेन हुआंग और Sam Altman के साथ McDonald’s में खाना खाते हुए नजर आ रहे थे। उन्होंने मजाक में स्पष्ट किया कि यह तस्वीर फर्जी है क्योंकि वह हैम्बर्गर नहीं खाते।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आम लोगों के लिए असली और AI-जनरेटेड कंटेंट के बीच फर्क करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। उनके अनुसार SynthID जैसे टूल्स डिजिटल कंटेंट की पहचान करने और ऑनलाइन गलत जानकारी (misinformation) को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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