भारतीय रुपया लगातार नौवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज करता रहा और 2026 में एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। इसका कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की निकासी और मध्य पूर्व संकट को लेकर बढ़ती चिंताएँ बताई जा रही हैं।