“यह व्यापार समझौता पंजाब के किसानों की कमर तोड़ देगा और युवाओं को संकट में धकेल देगा,” बोले बलबीर सिंह
“यह व्यापार समझौता पंजाब के किसानों की कमर तोड़ देगा और युवाओं को संकट में धकेल देगा,” बोले बलबीर सिंह
खबर खास, चंडीगढ़/मोहाली:
पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौता पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा है। इस संबंध में एक ज्ञापन जिला कांग्रेस अध्यक्ष कमल किशोर शर्मा, बलबीर सिंह सिद्धू और मोहाली के अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा डिप्टी कमिश्नर, मोहाली को सौंपा गया।
बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि सीमावर्ती और मुख्यतः कृषि आधारित राज्य होने के कारण पंजाब पर इस समझौते का सबसे अधिक नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सस्ती विदेशी कृषि उपज को भारतीय बाजारों में प्रवेश मिला, तो सीमित भूमि जोत पर खेती करने वाले पंजाब के छोटे और सीमांत किसान, भारी सरकारी सब्सिडी और अत्याधुनिक तकनीक से लैस बड़े अमेरिकी किसानों से कभी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे किसान गहरे संकट में चले जाएंगे।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी दी कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कमजोर होने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और कम होंगे। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने से नशे की समस्या और गंभीर होगी, जिससे राज्य में सामाजिक अस्थिरता बढ़ेगी।
रणनीतिक चिंताओं का उल्लेख करते हुए बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में आर्थिक अस्थिरता और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी का फायदा देश-विरोधी ताकतें उठा सकती हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर युवा ही राज्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की असली ढाल हैं।
देश के पूर्व नेतृत्व का हवाला देते हुए बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. मनमोहन सिंह ने हमेशा किसानों के हितों की रक्षा की और भारत में खाद्य संकट के दौर में भी कृषि बाजारों को विदेशी उत्पादों के लिए नहीं खोला। “वे जानते थे कि ऐसा करने से हमारी कृषि की रीढ़ टूट जाएगी। केंद्र सरकार को इतिहास से सबक लेना चाहिए,” उन्होंने कहा।
पंजाब के राज्यपाल से इस मुद्दे को भारत सरकार के समक्ष उठाने की अपील करते हुए बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा, “पंजाब के किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इस भारत–अमेरिका व्यापार समझौते की तुरंत पुनर्समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि हमारी कृषि अर्थव्यवस्था की रक्षा हो सके।”
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