टूटी स्टिक को कील से जोड़कर शुरू किया सफर, अब बनी नेशनल चैंपियनशिप की टॉप स्कोरर
टूटी स्टिक को कील से जोड़कर शुरू किया सफर, अब बनी नेशनल चैंपियनशिप की टॉप स्कोरर
ख़बर ख़ास | खेल
मध्य प्रदेश के सिवनी की 15 वर्षीय नौशीन नाज़ भारतीय हॉकी की उभरती हुई प्रतिभा के रूप में सामने आई हैं। हाल ही में आयोजित 16वीं हॉकी इंडिया सब-जूनियर महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 गोल दागे और टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर बनीं। उनकी यह उपलब्धि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिला रही है।
वर्तमान में भोपाल में U-18 नेशनल कोचिंग कैंप में प्रशिक्षण ले रहीं नौशीन का सफर संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में आर्थिक तंगी के कारण उनके पास हॉकी स्टिक तक नहीं थी। अपनी बड़ी बहन तहूर नाज़ से प्रेरित होकर उन्होंने मैदान में पड़ी एक टूटी हुई स्टिक उठाई, उसे एक लोहार से कील लगवाकर ठीक कराया और करीब एक साल तक उसी से अभ्यास किया। बाद में उन्हें डे-बोर्डिंग प्रोग्राम के तहत सही स्टिक मिली।
नौशीन को केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उनके समुदाय में लड़कियों के खेल खेलने को लेकर नकारात्मक सोच थी। हालात इतने कठिन हो गए कि उन्होंने दो साल तक हॉकी छोड़ दी और अपने पिता के साथ सब्जी बेचने में मदद की। उनके पिता पहले सब्जी विक्रेता और ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं और वर्तमान में मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
इस कठिन दौर में उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया और खेल में वापस लौटने के लिए प्रेरित किया। मां के समर्थन से नौशीन ने ग्वालियर विमेंस हॉकी अकादमी जॉइन की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गईं। वर्तमान में वह पूर्व भारतीय कप्तान रानी रामपाल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं, जिसे वह अपने जीवन का महत्वपूर्ण अवसर मानती हैं।
आज भी सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष करते हुए नौशीन का लक्ष्य U-18 एशिया कप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उनका सपना है कि वह देश के लिए खेलें, अपने परिवार का सहारा बनें और समाज को यह संदेश दें कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
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