अदालत ने दो पुलिसकर्मियों और विक्रम वाधवा के दोनों बेटों को भेजा जेल; CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और ड्यूटी लॉग की जांच जारी
अदालत ने दो पुलिसकर्मियों और विक्रम वाधवा के दोनों बेटों को भेजा जेल; CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और ड्यूटी लॉग की जांच जारी
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ की एक जिला अदालत ने बुधवार को ₹661 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले के मुख्य आरोपी विक्रम सिंह वाधवा को अस्पताल की बजाय होटल ले जाने के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
गिरफ्तार आरोपियों में चंडीगढ़ पुलिस के सब-इंस्पेक्टर (SI) जगमेर सिंह, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) सुरेश कुमार तथा विक्रम वाधवा के दोनों बेटे करण और कुनाल शामिल हैं। वहीं, विक्रम सिंह वाधवा को मंगलवार को पहले ही बुरैल जेल भेजा जा चुका है।
यह मामला मंगलवार को सामने आया, जब बुरैल जेल में बंद विक्रम वाधवा ने पेट में संक्रमण की शिकायत की थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल ले जाने की अनुमति दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, वाधवा को पुलिस सुरक्षा में जेल से बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिस टीम कथित रूप से उसे सेक्टर-22 स्थित होटल सिटी हार्ट लेकर पहुंच गई।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि होटल में वाधवा ने अपनी पत्नी और बेटों करण व कुनाल से मुलाकात की, भोजन किया और काफी समय तक वहीं रुका। घटना की सूचना मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने होटल में छापा मारा, जिसके बाद सभी पांच लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
पूछताछ के बाद सेक्टर-17 थाना पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 199, 261, 262, 62 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को अस्पताल की बजाय होटल ले जाने की पूरी घटना पहले से योजनाबद्ध थी या नहीं।
जांच अधिकारी होटल के CCTV फुटेज, एंट्री रजिस्टर, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और होटल में वाधवा से मिलने वाले लोगों की पहचान की जांच कर रहे हैं।
डीएसपी एसपीएस सोंधी ने बताया कि गिरफ्तार दोनों पुलिसकर्मियों के ड्यूटी रिकॉर्ड, मूवमेंट डिटेल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत की भी जांच की जा रही है। यदि सरकारी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
विक्रम सिंह वाधवा ₹661 करोड़ के सरकारी फंड गबन मामले का प्रमुख आरोपी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों, चंडीगढ़ नगर निगम तथा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी (CREST) परियोजना से सरकारी धन को कथित रूप से फर्जी तरीके से निजी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
जांच में दावा किया गया है कि वाधवा ने सह-आरोपी रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक कर्मचारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज जैसी शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर धन की हेराफेरी की।
बताया जा रहा है कि इस धन को ज्वैलर्स के माध्यम से नकदी में बदला गया और बाद में कथित रूप से इस साजिश में शामिल अधिकारियों एवं कारोबारियों के बीच बांटा गया।
पुलिस ने वाधवा से जुड़ी करीब ₹70 करोड़ मूल्य की संपत्तियों की भी पहचान की है, जिनमें महंगी आवासीय और व्यावसायिक अचल संपत्तियां शामिल हैं।
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