7 सितंबर तक पक्का मोर्चा, लंगर से लेकर रात गुजारने तक की पूरी तैयारी; बढ़ती भीड़ से बाजारों में दूध-सब्जियों की मांग बढ़ी, धरनास्थल पर सफाई और शौचालय की व्यवस्था बनी चुनौती
7 सितंबर तक पक्का मोर्चा, लंगर से लेकर रात गुजारने तक की पूरी तैयारी; बढ़ती भीड़ से बाजारों में दूध-सब्जियों की मांग बढ़ी, धरनास्थल पर सफाई और शौचालय की व्यवस्था बनी चुनौती
पंजाब के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बड़ा मोर्चा खोल दिया है। पंजाब के अलग-अलग जिलों से हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ धरनास्थल पर पहुंच चुके हैं। संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से फिलहाल सात सितंबर तक पक्का मोर्चा लगाने का ऐलान किया गया है, लेकिन किसानों की तैयारियों से साफ है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को लंबा खींचा जा सकता है।
किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस पहल होने तक वे बॉर्डर से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सरकार की ओर से अब तक कोई निर्णायक कदम नहीं उठाए जाने पर किसान संगठनों ने नाराजगी जताई है। आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए चार सितंबर को वरिष्ठ पदाधिकारियों की अहम बैठक भी बुलाई गई है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद आंदोलन को लेकर बड़ा फैसला या घोषणा हो सकती है।
धरनास्थल पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले किसानों ने सड़क के एक हिस्से में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर डेरा जमाया था, लेकिन अब दूसरे हिस्से में भी जमावड़ा बढ़ने लगा है। इसके चलते चंडीगढ़-मोहाली सीमा और आसपास के रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ और कई जगह जाम जैसे हालात बने रहे। महापंचायत के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ जारी रखेंगे।
मोर्चे पर किसानों के ठहरने और खाने-पीने के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। अलग-अलग जत्थेबंदियों की ओर से लंगर लगाए गए हैं और धरनास्थल पर ही खाना तैयार किया जा रहा है। लंगर की व्यवस्था संभालने के लिए महिलाएं भी दिहाड़ी पर काम करने के लिए पहुंच रही हैं। एक किसान ने बताया कि वह अपने गांव से करीब 35 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर मोर्चे में शामिल होने आया है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं।
रात होते ही धरनास्थल का माहौल और अलग नजर आया। दिनभर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले किसान रात भी बॉर्डर पर ही गुजार रहे हैं। कई किसान जमीन पर बिस्तर लगाकर सोते दिखाई दिए, जबकि कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पास ही आराम करते नजर आए। कई किसान देर रात तक अपने साथियों के साथ बैठकर अगले दिन की गतिविधियों और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा करते रहे। खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के बावजूद किसानों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी।
धरनास्थल पर मौजूद गुरतेज सिंह, जसविंदर सिंह और गुरदीप सिंह ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगें सरकार और प्रशासन के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया है। उनका कहना है कि घर-परिवार से दूर रहना आसान नहीं है, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने कहा कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं।
किसानों ने प्रशासन से धरनास्थल पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि कई दिनों तक बड़ी संख्या में किसानों के रहने के कारण पीने के पानी, सफाई और अस्थायी शौचालय जैसी सुविधाओं की जरूरत बढ़ गई है। बुजुर्ग किसानों और महिलाओं को भी इन व्यवस्थाओं की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संगरूर से पहुंचे किसान बलविंदर सिंह ने कहा कि कई दिनों से धरनास्थल पर रहने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने सफाई व्यवस्था बेहतर करने की मांग की। किसान करनैल सिंह ने पर्याप्त शौचालय नहीं होने से सुबह होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया, जबकि मिट्ठू सिंह ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की नियमित व्यवस्था जरूरी है। किसानों का कहना है कि धरनास्थल पर गंदगी बढ़ने से बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ है।
किसानों के बढ़ते जमावड़े का असर अब आसपास के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से लगातार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में किसान पहुंच रहे हैं, जिससे धरनास्थल पर लंगर के लिए दूध, सब्जी, आटा और दाल जैसी खाद्य सामग्री की मांग तेजी से बढ़ गई है। इसका असर मोहाली के फेज-11 मार्केट की आपूर्ति पर भी पड़ा है। बुधवार सुबह कई दुकानों पर दूध जल्दी खत्म हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दूध विक्रेता सुदेश कुमार ने बताया कि आंदोलन स्थल से अतिरिक्त मांग आ रही है और सप्लाई पहुंचने के बाद दूध तेजी से खत्म हो जाता है। फेज-11 निवासी सुजीत कुमार ने बताया कि सुबह दूध नहीं मिल पाया, इसलिए उन्होंने शाम की जरूरत को देखते हुए सुबह ही दूध खरीद लिया।
पुलिस और प्रशासन भी किसानों के बढ़ते जमावड़े को लेकर सतर्क हैं। महापंचायत को देखते हुए चंडीगढ़-मोहाली सीमा और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। किसानों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
अब किसानों ने साफ कर दिया है कि सात सितंबर तक चलने वाला यह पक्का मोर्चा सिर्फ प्रतीकात्मक धरना नहीं है। मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी भी है। चार सितंबर की बैठक में किसान नेता आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर किसानों का आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
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January 18, 2026
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