रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया आयाम, कम लागत में शक्तिशाली प्रोपल्शन तकनीक विकसित करने का लक्ष्य।
रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया आयाम, कम लागत में शक्तिशाली प्रोपल्शन तकनीक विकसित करने का लक्ष्य।
ख़बर ख़ास | नई दिल्ली
भारत के एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। बिहार के होनहार युवा सुब्रत शांडिल्य ने स्वदेशी तकनीक के बल पर एक ऐसी उड़ान भरी है, जो देश को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। सुब्रत शांडिल्य एक अत्याधुनिक और किफायती स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी तकनीकों और महंगे आयात पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह से समाप्त करना है।
सुब्रत शांडिल्य का यह प्रोजेक्ट केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। पारंपरिक रूप से एयरोस्पेस उद्योग में जेट इंजन का निर्माण बेहद जटिल, खर्चीला और विदेशी पेटेंट पर निर्भर रहता है। सुब्रत की टीम एक ऐसी डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे इंजन की उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी। इस किफायती स्वदेशी जेट इंजन का उपयोग मुख्य रूप से मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs), ड्रोन्स, लाइट एयरक्राफ्ट और रक्षा अनुप्रयोगों में किया जा सकेगा।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उन्नत धातुओं, अत्याधुनिक 3D प्रिंटिंग और आधुनिक एरोडायनामिक डिजाइनों का उपयोग करके इस इंजन को तैयार किया जा रहा है। किफायती होने के साथ-साथ यह जेट इंजन अत्यधिक ईंधन-कुशल और मजबूत प्रदर्शन देने में सक्षम होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रोजेक्ट व्यावसायिक रूप से सफल होता है, तो भारत को छोटे और मध्यम श्रेणी के इंजनों के आयात के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे न केवल अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देश के रक्षा ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
सुब्रत शांडिल्य की यह उपलब्धि बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी दूरदर्शिता, कड़े परिश्रम और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के ज्ञान के बल पर उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि भारत का युवा वैश्विक स्तर की तकनीक देश की मिट्टी पर ही तैयार कर सकता है। उनके इस प्रयास से स्थानीय स्तर पर उच्च तकनीक वाले रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवा शोधकर्ताओं को रक्षा और एयरोस्पेस के क्षेत्र में नए नवाचार करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
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