54 ग्राम हेरोइन बरामदगी के 2020 के मामले में फैसला; छह साल तक नियमित पेशी, दूसरे अपराध में संलिप्तता नहीं और सुधार के प्रयासों को कोर्ट ने माना अहम
54 ग्राम हेरोइन बरामदगी के 2020 के मामले में फैसला; छह साल तक नियमित पेशी, दूसरे अपराध में संलिप्तता नहीं और सुधार के प्रयासों को कोर्ट ने माना अहम
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ में हेरोइन बरामदगी के मामले में दोषी ठहराए गए एक युवक को एनडीपीएस की विशेष अदालत ने राहत दी है। कोर्ट ने उसे दोबारा जेल भेजने के बजाय अब तक हिरासत में बिताई अवधि को ही उसकी पूरी सजा मान लिया। कोर्ट ने यह फैसला पिछले छह वर्षों के दौरान उसके आचरण और सुधार के प्रयासों को ध्यान में रखते हुए लिया।
विशेष न्यायाधीश रमन गोकलाने ने कहा कि केवल एक गलती के आधार पर किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति को सजा देना नहीं है, बल्कि उसे सुधार और समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल होने का अवसर देना भी है।
2020 में 54 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी
यह मामला वर्ष 2020 का है। उस समय चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-23 निवासी अबिनाश को 54 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अबिनाश को दोषी पाया। हालांकि सजा तय करते समय अदालत ने केवल अपराध की प्रकृति पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि पिछले छह वर्षों के दौरान उसके व्यवहार और रिकॉर्ड को भी देखा।
कोर्ट के अनुसार, अबिनाश ने पूरे मुकदमे के दौरान नियमित रूप से अदालत में पेश होकर कार्यवाही में सहयोग किया। उसने सुनवाई से बचने या कार्यवाही से भागने की कोशिश नहीं की। किसी भी तारीख पर उसके अनुपस्थित रहने की जानकारी भी सामने नहीं आई।
लंबे ट्रायल के दौरान आचरण को माना अहम
कोर्ट ने कहा कि मामला कई वर्षों तक चलने के बावजूद ऐसा कोई रिकॉर्ड उसके सामने नहीं आया, जिससे यह पता चले कि अबिनाश किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल हुआ हो।
अदालत ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला किया कि अबिनाश द्वारा पहले ही हिरासत में बिताई गई अवधि को इस मामले में लगाई गई सजा माना जाएगा। इसके चलते उसे दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा।
कोर्ट के इस फैसले में लंबे समय तक चले मुकदमे के दौरान आरोपी के आचरण, नियमित अदालत में पेशी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से दूर रहने जैसे पहलुओं को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया।
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