पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आठ कर्मचारी यूनियनों से की मुलाकात, लंबित मांगों पर जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आठ कर्मचारी यूनियनों से की मुलाकात, लंबित मांगों पर जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के वित्त मंत्री और कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को शिक्षा विभाग की पांच यूनियनों, आंगनवाड़ी से जुड़ी दो यूनियनों और आउटसोर्स कर्मचारियों की एक यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ सिलसिलेवार बैठकें कीं।
बैठकों के दौरान वित्त मंत्री ने सामाजिक सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम ₹60 लाख का जीवन बीमा कवर सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए उन बैंकों के साथ समन्वय किया जाए, जिनके माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वेतन का भुगतान किया जाता है।
इन बैठकों से पंजाब सरकार की कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने और प्रशासनिक एवं वित्तीय मुद्दों का विचार-विमर्श के जरिए समाधान करने की प्रतिबद्धता सामने आई।
विभिन्न यूनियनों द्वारा उठाई गई चिंताओं को सुनते हुए चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के कर्मचारी हितैषी रुख को दोहराया। उन्होंने प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि उनकी अधिकांश जायज मांगें पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय रूप से विचाराधीन हैं।
वित्त मंत्री ने कहा, “हम कर्मचारियों के सामने आ रही कठिनाइयों को समझते हैं। उनकी अधिकांश जायज मांगों के समाधान के लिए आवश्यक प्रशासनिक ढांचा पहले से तैयार है और सरकार प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए काम कर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार जल्द से जल्द सकारात्मक परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध है और विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है।
बैठकों के दौरान बेरोजगार बी.एड. टीईटी पास अध्यापक यूनियन, बेरोजगार पीएसटीईटी पास आर्ट एंड क्राफ्ट संघर्ष यूनियन, मुरबाहल कच्चे अध्यापक यूनियन, एसएसए/एमडीएम नॉन-टीचिंग एम्प्लॉइज यूनियन पंजाब और अनएडेड स्टाफ ऑफ एडेड स्कूल्स फ्रंट के प्रतिनिधियों ने नौकरी की सुरक्षा और लंबे समय से लंबित रोजगार संबंधी मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपे।
वहीं, आंगनवाड़ी मुलाजिम यूनियन पंजाब (सीटू) और जुझारू आंगनवाड़ी वर्कर/हेल्पर यूनियन पंजाब के प्रतिनिधियों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी तथा सेवा शर्तों में सुधार की मांग रखी।
इस बीच, एनलिस्टमेंट-आउटसोर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी ने आउटसोर्स कर्मचारियों को प्रस्तावित 2026 कार्मिक कानून के दायरे में शामिल करने की मांग की। इसके अलावा कमेटी ने सेवानिवृत्ति के बाद लाभ और सुनिश्चित न्यूनतम वेतन की भी मांग उठाई।
सभी आठ यूनियनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने बैठकों में हिस्सा लिया और कैबिनेट सब-कमेटी के समक्ष अपनी-अपनी मांगें रखीं।
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