पंजाब के मुख्यमंत्री बोले- लाखों रुपये में बिक रहे हैं परीक्षा प्रश्नपत्र, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मेहनती छात्रों का भविष्य हो रहा बर्बाद
पंजाब के मुख्यमंत्री बोले- लाखों रुपये में बिक रहे हैं परीक्षा प्रश्नपत्र, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मेहनती छात्रों का भविष्य हो रहा बर्बाद
खबर खास | चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के कार्यकाल के अंतिम पंजाब विधानसभा मानसून सत्र में सोमवार को परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर जमकर हंगामा और तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर जोरदार हमला बोला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र अपनी किस्मत बदलने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पैसे देकर खरीदे जाते हैं तो उनके सपने चकनाचूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रश्नपत्रों की खरीद-फरोख्त है। पेपर तभी लीक होता है जब कोई उसे खरीदता है। यह हमारे बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला है।"
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पेपर लीक और नकल गिरोह परीक्षा प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए 18 से 20 लाख रुपये तक वसूलते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई गिरफ्तारियों से इस कथित रैकेट के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर निशाना
भगवंत मान ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने शुरुआत में पेपर लीक के मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार नहीं किया और छात्रों तथा युवाओं के बढ़ते दबाव के बाद ही इस पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की बात समाधान नहीं है। असली चुनौती तो पेपर लीक को रोकना है।
उन्होंने सवाल उठाया, "जब सरकार सेना और वायुसेना को सुरक्षा और अन्य अभियानों के लिए तैनात कर सकती है, तो परीक्षा के प्रश्नपत्रों की बिक्री क्यों नहीं रोक सकती?"
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी जवाबदेही तय नहीं की जाती।
भाजपा शासित राज्यों पर लगाए आरोप
मुख्यमंत्री ने अपने पास उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच देशभर में 65 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिनमें अधिकांश भाजपा शासित राज्यों में सामने आईं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 के बाद से अब तक कुल 93 पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं।
उन्होंने कहा, "यह केवल प्रश्नपत्रों का लीक होना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और उनकी किस्मत के साथ विश्वासघात है।"
छात्र आंदोलनों का किया समर्थन
मुख्यमंत्री ने परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे युवाओं की मांगें पूरी तरह जायज हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनिश्चितता और परीक्षा संबंधी विवादों के कारण 22 छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली। उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन और पैलेट गन के इस्तेमाल की भी आलोचना की।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
भगवंत मान ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि उसने छात्रों के आंदोलन में उनका साथ नहीं दिया।
विधानसभा में विपक्षी बेंचों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि खाली सीटें इस बात का संकेत हैं कि 2027 के चुनाव के बाद कांग्रेस की स्थिति कैसी हो सकती है।
पंजाब के मामलों का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि पंजाब में भी नायब तहसीलदार परीक्षा और फार्मेसी परीक्षा से जुड़े दो मामलों में अनियमितताएं सामने आई थीं।
हालांकि उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डिजिटल निगरानी के जरिए फार्मेसी परीक्षा में हुई गड़बड़ी का केवल 15 मिनट के भीतर पता लगा लिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अब तक 68,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दे चुकी है और परीक्षाओं तथा भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पेपर लीक के मुद्दे पर चली इस तीखी बहस के कारण विधानसभा का अंतिम मानसून सत्र पूरे दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे का केंद्र बना रहा।
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