25 वर्षीय भिवानी की बॉक्सर ने महिला 57 किग्रा फाइनल में मौजूदा चैंपियन माइकेला वॉल्श को हराकर रचा इतिहास
25 वर्षीय भिवानी की बॉक्सर ने महिला 57 किग्रा फाइनल में मौजूदा चैंपियन माइकेला वॉल्श को हराकर रचा इतिहास
खबर खास | नई दिल्ली
राष्ट्रमंडल खेल 2026 के 10वें दिन भारत का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। प्रीति पवार के स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब जैस्मिन लांबोरिया ने भी मुक्केबाज़ी में भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिला दिया। उनके इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही भारत के कुल स्वर्ण पदकों की संख्या सात हो गई, जबकि बॉक्सिंग में यह दूसरा गोल्ड है।
हरियाणा के भिवानी की 25 वर्षीय मुक्केबाज़ जैस्मिन लांबोरिया ने महिला 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में मौजूदा चैंपियन माइकेला वॉल्श को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि उनके करियर की एक बड़ी सफलता है। इससे पहले जैस्मिन ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता था।
फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और कड़ा रहा। दोनों मुक्केबाज़ों ने शुरुआत से ही संयमित और रणनीतिक खेल दिखाया। पहले राउंड में जैस्मिन ने स्प्लिट फैसले (स्प्लिट वर्डिक्ट) के जरिए बढ़त बनाई और शुरुआती बढ़त हासिल कर ली। मुकाबले के दौरान दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे की रणनीति को भांपते हुए सावधानी से पंच लगाए।
दूसरे राउंड में भारतीय मुक्केबाज़ ने शानदार वापसी करते हुए एकतरफा प्रदर्शन किया। बाएं हाथ से खेलने वाली जैस्मिन ने सर्वसम्मत फैसले (यूनानिमस वर्डिक्ट) के साथ यह राउंड अपने नाम किया। उन्होंने कई प्रभावी वन-टू कॉम्बिनेशन लगाए। हालांकि उनके कुछ हुक पंच निशाने पर नहीं लगे, लेकिन उनकी लंबी पहुंच (रीच) ने मुकाबले पर उनकी पकड़ मजबूत बनाए रखी और उन्हें निर्णायक बढ़त दिलाई।
जैस्मिन लांबोरिया की इस जीत ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के पदक अभियान को और मजबूती दी है। साथ ही यह सफलता अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला मुक्केबाज़ी की बढ़ती ताकत और गहराई को भी दर्शाती है।
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