इस पूरे मामले में सोलन के एसडीएम ने पहले ही अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में चेस्टर हिल्स रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के संकेत दिए थे।
इस पूरे मामले में सोलन के एसडीएम ने पहले ही अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में चेस्टर हिल्स रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के संकेत दिए थे।
खबर खास, शिमला :
हिमाचल सरकार ने आखिरकार चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट से जुड़े जमीनी विवाद में कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा को जांच के आदेश जारी किए हैं। इस बाबत सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले में हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट 1972 की धारा 118 के तहत उल्लंघन का केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा सरकार ने 6 दिसंबर 2025 को सोलन के उपायुक्त को लिखे पत्र को भी निरस्त कर दिया है, जिसमें चेस्टर हिल विवाद में कार्रवाई रोकने को कहा गया था। सरकार ने यह भी कहा है कि संबंधित सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए। सरकार के इस आदेश के बाद इन मामले में हुए सौदों में कथित अनियमितताओं व संभावित घोटाले में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में बेनामी लेनदेन सिद्ध होता है, तो संबंधित जमीन सरकार में निहित (वेस्ट) की जा सकती है।
हालांकि इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सोलन के एसडीएम (नागरिक) की विस्तृत जांच रिपोर्ट है, जिसमें चेस्टर हिल्स रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के संकेत दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन भले ही कागजों में एक स्थानीय कृषक के नाम पर दर्ज है, लेकिन वास्तविक विकास, निर्माण, मार्केटिंग और फ्लैटों की बिक्री एक गैर-कृषक फर्म द्वारा संचालित की जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संयुक्त विकास समझौते (जेडीए) के जरिए जमीन से जुड़े अधिकांश अधिकार डेवलपर को हस्तांतरित कर दिए गए थे। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि फ्लैट खरीदारों से प्राप्त भुगतान सीधे डेवलपर फर्म के खातों में जमा हुए। खरीदारों द्वारा प्रस्तुत एग्रीमेंट, रसीदें और बैंक लेनदेन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि परियोजना का वास्तविक वित्तीय और व्यावसायिक नियंत्रण डेवलपर के पास था।
रिपोर्ट में आय और संपत्ति के बीच असामान्यता की ओर भी इशारा किया गया है। सीमित आय के बावजूद बड़े पैमाने पर भूमि खरीद को संदिग्ध बताते हुए इसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई गई है।
वहीं, इस मामले को लेकर बीते 23 मार्च को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय शर्मा ने इस मामले में छोटा शिमला पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए मुख्य सचिव संजय गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। शिकायत में करीब 1500 करोड़ रुपये के कथित जमीन घोटाले के आरोप लगाए गए हैं।
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