गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों-रेपसीड में 413 और कुसुम में 675 रुपये की बढ़ोतरी
गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों-रेपसीड में 413 और कुसुम में 675 रुपये की बढ़ोतरी
ख़बर खास | हरियाणा
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने सभी छह प्रमुख रबी फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और खेती से मिलने वाले रिटर्न को मजबूत करना है।
नई दरों के अनुसार, गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। जौ के MSP में 136 रुपये की वृद्धि हुई है और अब यह 2,286 रुपये प्रति क्विंटल होगा। चने का MSP 83 रुपये बढ़कर 5,958 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। मसूर के MSP में 390 रुपये की बढ़ोतरी के बाद यह 7,390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसी तरह रेपसीड और सरसों का MSP 413 रुपये बढ़ाकर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल और कुसुम का MSP 675 रुपये बढ़ाकर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।
छह रबी फसलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के MSP में की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों तथा मसूर का स्थान है। वहीं गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। पिछले विपणन सीजन की तुलना में गेहूं का MSP 2,585 रुपये से बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि MSP में यह वृद्धि किसानों की आय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हरियाणा के किसान संशोधित MSP का लाभ उठाएंगे और देश के खाद्य भंडार को मजबूत करने में योगदान देंगे। सैनी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की MSP नीति किसानों को उनकी फसलों के लिए लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
केंद्र सरकार के अनुसार, नई MSP दरें 2018-19 के केंद्रीय बजट में किए गए उस प्रावधान के अनुरूप हैं, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर रखने की नीति अपनाई गई थी। 2027-28 के लिए उत्पादन लागत के मुकाबले गेहूं पर अनुमानित मार्जिन 106 प्रतिशत, रेपसीड और सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चने पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत बताया गया है।
सरकार ने यह भी कहा है कि हाल के वर्षों में दालों और तिलहन जैसी फसलों के MSP में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी का उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है। नई दरों में भी गेहूं की तुलना में दालों और तिलहन की कुछ फसलों के MSP में अधिक वृद्धि की गई है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद सरकार ने जताई है।
2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए संशोधित MSP ऐसे समय में घोषित किए गए हैं जब रबी फसलों की बुवाई का मौसम नजदीक है। नई दरों के साथ गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम की फसलों के लिए किसानों को मिलने वाला घोषित समर्थन मूल्य पहले की तुलना में बढ़ गया है।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
Comments 0