अस्मिता डे ने दिलाया भारत का पहला कॉमनवेल्थ जूडो गोल्ड, हर्ष सिंह बने स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी
अस्मिता डे ने दिलाया भारत का पहला कॉमनवेल्थ जूडो गोल्ड, हर्ष सिंह बने स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी
खबर खास | ग्लासगो
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय जूडो के इतिहास का सबसे यादगार अध्याय बन गया। भारत ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स के एक ही संस्करण में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
साल 1990 से लेकर 2022 तक भारत कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया था। यह लंबा इंतजार आखिरकार तब समाप्त हुआ जब अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को जूडो का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक दिलाया।
अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के कुछ ही मिनट बाद 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीयता प्राप्त जोशुआ कैट्ज़ को हराकर भारत के लिए दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए।
भारत के लिए इस ऐतिहासिक दिन को और खास बनाते हुए यामिनी मौर्य ने महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। यह प्रदर्शन कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का अब तक का सबसे सफल जूडो अभियान साबित हुआ।
अस्मिता डे ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक और आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने शुरुआत से ही विरोधी पर दबाव बनाए रखा और शानदार हिप थ्रो लगाकर बढ़त हासिल की।
इसके बाद उन्होंने बेहतरीन ग्राउंड होल्ड के जरिए प्रतिद्वंद्वी को निर्धारित समय तक मैट पर पूरी तरह नियंत्रित रखा। उनके इस दबदबे के चलते उन्हें इप्पोन मिला और उन्होंने मुकाबला जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं।
हर्ष सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया।
फाइनल में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज़ से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे समय तक कुमी-काता (ग्रिप फाइटिंग) की रणनीतिक जंग चली। मुकाबले के अंतिम एक मिनट से भी कम समय बाकी था, तभी हर्ष ने कैट्ज़ की आगे बढ़ने की कोशिश को भांपते हुए शानदार ताई-ओतोशी थ्रो लगाया।
इस दांव पर उन्हें निर्णायक वाज़ा-अरी मिला। इसके बाद उन्होंने अंत तक बढ़त बनाए रखी और 10-0 से मुकाबला जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए।
| खिलाड़ी | वर्ग | पदक |
|---|---|---|
| अस्मिता डे | महिला 48 किग्रा | 🥇 स्वर्ण |
| हर्ष सिंह | पुरुष 60 किग्रा | 🥇 स्वर्ण |
| यामिनी मौर्य | महिला 57 किग्रा | 🥈 रजत |
दो स्वर्ण पदकों की यह ऐतिहासिक सफलता भारतीय जूडो के लिए एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। तीन दशक से अधिक समय तक कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक का इंतजार करने के बाद भारत ने एक ही दिन अपना पहला महिला और पहला पुरुष जूडो चैंपियन तैयार किया। यह उपलब्धि न केवल भारतीय जूडो के बढ़ते स्तर को दर्शाती है, बल्कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर और बड़ी सफलताओं की उम्मीद भी जगाती है।
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