आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि व्यवस्था पर सवाल उठाने, बेहतर सरकारी सुविधाओं की मांग करने और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखने वालों को ‘मानसिक नक्सली’ नहीं कहा जाना चाहिए।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि व्यवस्था पर सवाल उठाने, बेहतर सरकारी सुविधाओं की मांग करने और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखने वालों को ‘मानसिक नक्सली’ नहीं कहा जाना चाहिए।
खबर खास | नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथित बयान को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है, जिसमें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान सरकार का विरोध करने वाली आवाजों के लिए “मानसिक नक्सली” शब्द का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
सोमवार को जारी एक वीडियो संदेश में केजरीवाल ने कहा, “हां, मैं मानसिक नक्सली हूं।” उन्होंने खुद को देशभक्त बताते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री की परिभाषा के अनुसार व्यवस्था पर सवाल उठाना, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखना और खराब व्यवस्था को बदलने की मांग करना “मानसिक नक्सलवाद” है, तो उन्हें इस पहचान पर गर्व है।
केजरीवाल ने कहा कि बेहतर सरकारी स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी, सीवर, जल निकासी और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की मांग करने वाले लोगों को देश विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए।
उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर का भी जिक्र किया। केजरीवाल ने कहा कि अगर ये दोनों आज जीवित होते और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समानता तथा बदलाव की लड़ाई लड़ते, तो आज की परिभाषा के अनुसार उन्हें भी “मानसिक नक्सली” कहा जा सकता था।
केजरीवाल ने कहा कि सरकार से सवाल करना और देश के खिलाफ काम करना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश के खिलाफ कुछ करता या बोलता है तो वह उसका पूरी ताकत से विरोध करेंगे।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर सवाल उठाने वाले युवाओं से असहज है।
संजय सिंह ने कहा कि युवा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं पर रोक लगाने, बेहतर शिक्षा और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नौकरी के लिए प्रदर्शन करने और प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं को भी “मानसिक नक्सली” कहा जाएगा।
उन्होंने बच्चों की ओर से बेहतर स्कूलों, अच्छे कक्षों, जरूरी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन की मांग का भी जिक्र किया। सिंह ने सवाल किया कि ऐसी मांगें उठाना क्या “मानसिक नक्सलवाद” है।
संजय सिंह ने सामाजिक माध्यम एक्स पर भी सरकार से सवाल करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ आवाज उठाने वाली युवा पीढ़ी और बेहतर स्कूलों की मांग करने वाले बच्चों को देश विरोधी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
केजरीवाल और संजय सिंह के इन बयानों के बाद आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। विवाद का केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ उठने वाली आवाजों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर इस्तेमाल किए जा रहे शब्दों को बनाया जा रहा है।
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