वैश्विक तेल तनाव बढ़ने के बाद नागरिकों से ईंधन के उपयोग में कटौती करने, एक साल के लिए सोने की खरीद से बचने के लिए कहा गया
वैश्विक तेल तनाव बढ़ने के बाद नागरिकों से ईंधन के उपयोग में कटौती करने, एक साल के लिए सोने की खरीद से बचने के लिए कहा गया
खबर खास | नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल को एक बार फिर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यालयों और कंपनियों से कहा कि जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। इसके साथ ही ऑनलाइन मीटिंग्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का अधिक उपयोग करने पर भी जोर दिया, ताकि अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत कम हो सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां केवल सरकार की परीक्षा नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के लिए चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार की बचत करना और राष्ट्रीय संसाधनों की रक्षा करना अब देशभक्ति का महत्वपूर्ण रूप माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल, डीजल और गैस का अत्यधिक उपयोग सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस स्थिति में उन्होंने हर नागरिक से जिम्मेदारी निभाते हुए ईंधन बचाने की अपील की।
प्रधानमंत्री की अपील का सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला हिस्सा सोने की खरीदारी को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि भारत हर साल सोने के आयात पर भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करता है। उन्होंने पुराने समय के युद्ध और राष्ट्रीय संकटों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग देशहित में सोना दान तक किया करते थे।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार लोगों से सोना दान करने की मांग नहीं कर रही है। उन्होंने केवल स्वेच्छा से अगले एक वर्ष तक नई सोने की ज्वेलरी खरीदने से बचने की अपील की, चाहे वह शादी, पारिवारिक समारोह या अन्य उत्सव ही क्यों न हो।
प्रधानमंत्री ने किसानों से भी सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे उर्वरकों का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हजारों रुपये कीमत वाले उर्वरक भारतीय किसानों को बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का तेजी से विस्तार कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में पाइप्ड गैस और सीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उनके अनुसार ये प्रयास भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट का मजबूती और स्थिरता के साथ सामना करने में मदद कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश में यह स्पष्ट किया गया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में भारत की ताकत केवल सरकारी कदमों से नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी से भी तय होगी।
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