उमर अब्दुल्ला, सुवेंदु अधिकारी, भजनलाल शर्मा, भगवंत मान और हिमंत बिस्वा सरमा देश के सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल
उमर अब्दुल्ला, सुवेंदु अधिकारी, भजनलाल शर्मा, भगवंत मान और हिमंत बिस्वा सरमा देश के सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल
खबर खास | चंडीगढ़/नई दिल्ली
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान देश के सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। यह विश्लेषण 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के 31 मौजूदा मुख्यमंत्रियों द्वारा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए हलफनामों पर आधारित है। रिपोर्ट देश के शीर्ष राज्य नेताओं की आर्थिक पृष्ठभूमि में बड़े अंतर को दर्शाती है।
सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों में भगवंत मान
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने करीब ₹1.97 करोड़ की संपत्ति घोषित की है। इसके साथ ही वह देश के सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हो गए हैं। इस श्रेणी में जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी, राजस्थान के भजनलाल शर्मा और असम के हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्रियों की औसत संपत्ति ₹118 करोड़
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के मुख्यमंत्रियों की औसत घोषित संपत्ति ₹118.07 करोड़ है। हालांकि, यह औसत कुछ बेहद अमीर मुख्यमंत्रियों की बड़ी संपत्ति के कारण काफी प्रभावित हुआ है। इसके चलते देश के सबसे अमीर और सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों के बीच भारी आर्थिक अंतर दिखाई देता है।
डी.के. शिवकुमार सबसे अमीर मुख्यमंत्री
रिपोर्ट में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को देश का सबसे अमीर मुख्यमंत्री बताया गया है। उन्होंने ₹1,413 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है। उनके बाद एन. चंद्रबाबू नायडू की संपत्ति करीब ₹931 करोड़, सी. जोसेफ विजय की ₹648 करोड़ और पेमा खांडू की ₹332 करोड़ बताई गई है। ये नेता उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं, जिनकी घोषित संपत्ति कई सौ करोड़ रुपये है।
भगवंत मान की स्थिति क्यों है खास
देश के कई मुख्यमंत्रियों ने सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत मान की घोषित संपत्ति ₹2 करोड़ से कम होना खासा चर्चा का विषय बन गया है। व्यक्तिगत संपत्ति के लिहाज से उनका नाम देश के सबसे साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल है। पंजाब के दृष्टिकोण से भी यह तथ्य महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपराधिक मामलों को लेकर भी चिंता
एडीआर की रिपोर्ट में मौजूदा मुख्यमंत्रियों की आपराधिक पृष्ठभूमि का भी विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 में से 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि 11 मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं। यह आंकड़ा भारतीय चुनावी राजनीति में आपराधिक मामलों की निरंतर मौजूदगी को लेकर चिंता पैदा करता है।
शिक्षा और उम्र का प्रोफाइल
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा मुख्यमंत्रियों में सबसे बड़ी संख्या स्नातकोत्तर यानी पोस्टग्रेजुएट नेताओं की है। इसके बाद स्नातक और प्रोफेशनल डिग्री धारक मुख्यमंत्रियों का स्थान है। उम्र के लिहाज से 51 से 60 वर्ष के आयु वर्ग में सबसे अधिक मुख्यमंत्री हैं, जिससे संकेत मिलता है कि राज्य नेतृत्व में अनुभवी नेताओं का दबदबा बना हुआ है।
महिला प्रतिनिधित्व अब भी सीमित
रिपोर्ट में राज्य स्तर की राजनीति में लैंगिक असमानता की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। विश्लेषण किए गए 31 मुख्यमंत्रियों में केवल एक महिला मुख्यमंत्री हैं। यह देश के सर्वोच्च राज्य स्तरीय राजनीतिक पदों पर महिलाओं की सीमित भागीदारी को दर्शाता है।
पंजाब के लिए क्या है खास
एडीआर की रिपोर्ट देश के मुख्यमंत्रियों की आर्थिक स्थिति में बड़े अंतर की तस्वीर पेश करती है। एक ओर ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनकी घोषित संपत्ति ₹1,400 करोड़ से अधिक है, वहीं दूसरी ओर कुछ नेताओं की संपत्ति ₹2 करोड़ से भी कम है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल होना इस रिपोर्ट को पंजाब के लिए खास बनाता है। उनकी घोषित संपत्ति की तुलना देश के कई अन्य मुख्यमंत्रियों की बड़ी संपत्ति से करने पर यह अंतर और भी स्पष्ट दिखाई देता है।
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