कृषि मंत्री बोले—जल संरक्षण तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ₹40 करोड़ का प्रावधान, 2025-26 में 23,410 किसानों को मिला लाभ
कृषि मंत्री बोले—जल संरक्षण तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ₹40 करोड़ का प्रावधान, 2025-26 में 23,410 किसानों को मिला लाभ
ख़बर ख़ास | चंडीगढ़
पंजाब सरकार ने भूजल संरक्षण और टिकाऊ धान खेती को बढ़ावा देने के लिए डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर) तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बनाई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने घोषणा की है कि राज्य ने 2026-27 के खरीफ सीजन में 5 लाख एकड़ भूमि को डीएसआर के तहत लाने का लक्ष्य तय किया है। इस योजना के लिए सरकार ने ₹40 करोड़ का बजट प्रावधान भी किया है।
मंत्री ने बताया कि 2025-26 के खरीफ सीजन में डीएसआर तकनीक को किसानों से अच्छा समर्थन मिला है। इस दौरान 23,410 किसानों ने 2,35,899 एकड़ क्षेत्र में इस तकनीक को अपनाया। सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,500 प्रति एकड़ की दर से सीधे उनके बैंक खातों में ₹35.38 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की है।
गुरमीत सिंह खुडियां ने इसे “जल संरक्षण के लिए किसान-नेतृत्व वाली क्रांति” बताते हुए कहा कि इस तकनीक से पंजाब के घटते भूजल स्तर को बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो सरकार की इस पहल की सफलता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे बताया कि डीएसआर योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल पहले से ही सक्रिय है, जिससे किसान आसानी से आवेदन कर सकते हैं और सरकारी प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, डीएसआर तकनीक में धान की रोपाई और पडलिंग की आवश्यकता नहीं होती, जिससे 15 से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है और श्रम लागत भी कम हो जाती है। यह तकनीक न केवल किसानों की उत्पादन लागत घटाती है, बल्कि पंजाब में तेजी से घट रहे भूजल स्तर को स्थिर करने में भी मददगार साबित हो रही है।
सरकार का मानना है कि डीएसआर का विस्तार राज्य में कृषि को अधिक टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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