ड्रग्स के खिलाफ जंग में पंजाब सरकार को बड़ी सफलता, इलाज, पुनर्वास और काउंसलिंग के जरिए हजारों युवाओं की मुख्यधारा में वापसी
ड्रग्स के खिलाफ जंग में पंजाब सरकार को बड़ी सफलता, इलाज, पुनर्वास और काउंसलिंग के जरिए हजारों युवाओं की मुख्यधारा में वापसी
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब सरकार के महत्वाकांक्षी एंटी-ड्रग अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ ने राज्य में नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई को नई दिशा दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के तहत अब तक 90 हजार से अधिक नशा पीड़ितों को डि-एडिक्शन, उपचार और पुनर्वास कार्यक्रमों से जोड़ा गया है, जिससे हजारों परिवारों को नई उम्मीद मिली है।
1 मार्च 2025 को पंजाब सरकार द्वारा शुरू किए गए इस विशेष अभियान का उद्देश्य केवल नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास के माध्यम से सामान्य जीवन की ओर वापस लाना भी है। सरकार की यह दोहरी रणनीति राज्य में सकारात्मक परिणाम देती दिखाई दे रही है।
डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मार्च 2025 से मई 2026 के बीच राज्यभर के डि-एडिक्शन सेंटरों और आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) केंद्रों में 90 हजार से अधिक लोगों का इलाज किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना नहीं, बल्कि नशे से प्रभावित हर व्यक्ति को नई शुरुआत का अवसर देना है।
मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में परिवार, स्कूल और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर विशेष ध्यान दें। मूड स्विंग, पढ़ाई में गिरावट, सामाजिक दूरी, अत्यधिक गोपनीयता, पैसों की बढ़ती मांग और दैनिक गतिविधियों में रुचि कम होना नशे की ओर बढ़ने के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत विशेषज्ञों से संपर्क करें। समय रहते काउंसलिंग और चिकित्सा सहायता मिलने से युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाला जा सकता है।
अभियान से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि उपचार और काउंसलिंग के जरिए कई लोगों ने नशे को छोड़कर नई जिंदगी शुरू की है। लाभार्थियों ने भी सरकारी डि-एडिक्शन केंद्रों की सराहना करते हुए कहा कि यहां उन्हें सम्मान, सहयोग और जीवन को दोबारा संवारने का अवसर मिला।
पंजाब सरकार ने दोहराया कि नशे के खिलाफ उसकी नीति डि-एडिक्शन, पुनर्वास और काउंसलिंग के तीन मजबूत स्तंभों पर आधारित है। सरकार का मानना है कि पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ परिवारों, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाज की सामूहिक भागीदारी से ही पंजाब को नशा-मुक्त बनाया जा सकता है।
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