खेल विज्ञान, फिटनेस और रिकवरी पर खास ध्यान से बेहतर हुआ प्रदर्शन, विश्व चैंपियनशिप से पहले आत्मविश्वास बढ़ा
खेल विज्ञान, फिटनेस और रिकवरी पर खास ध्यान से बेहतर हुआ प्रदर्शन, विश्व चैंपियनशिप से पहले आत्मविश्वास बढ़ा
ख़बर ख़ास | खेल
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने 2026 में अपने खेल में आई निरंतरता का श्रेय सिर्फ कोर्ट पर की गई मेहनत को नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे चल रही व्यवस्थित तैयारी को दिया है। नई दिल्ली में होने वाली विश्व चैंपियनशिप से पहले सिंधु ने बताया कि उनकी खेल विज्ञान, फिजियोथेरेपी और शक्ति एवं शारीरिक तैयारी की टीम ने उनकी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम किया है।
सिंधु के मुताबिक, लंबे समय तक पेशेवर बैडमिंटन खेलने के बाद उनके शरीर की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी टीम ने यह तय किया कि कब प्रशिक्षण का भार बढ़ाना है और कब शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी देनी है।
सिंधु ने बताया कि उनकी टीम ने साथ बैठकर उन क्षेत्रों की पहचान की, जिनमें सुधार की जरूरत थी। इसके बाद प्रशिक्षक के साथ चर्चा कर प्रशिक्षण और तैयारी में जरूरी बदलाव किए गए। उनके अनुसार, इसी सामूहिक प्रयास ने उनके खेल में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई है।
भारतीय स्टार ने कहा कि दर्शकों को सिर्फ मैच के दौरान खिलाड़ी का प्रदर्शन दिखाई देता है, लेकिन असली मेहनत उससे काफी पहले शुरू हो जाती है। फिटनेस, रिकवरी और शरीर की थकान पर लगातार नजर रखना जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक थकान प्रदर्शन को प्रभावित करने के साथ चोट का खतरा भी बढ़ा सकती है।
सिंधु ने बताया कि आधुनिक खेल विज्ञान तकनीक ने भी उनकी तैयारी को बेहतर बनाया है। विभिन्न उपकरणों के जरिए उनकी ताकत और थकान के स्तर की निगरानी की जाती है। इसके आधार पर तय किया जाता है कि किसी दिन उन्हें कितनी मेहनत करनी है और किस तरह का प्रशिक्षण उनके लिए बेहतर रहेगा।
2016 ओलंपिक रजत पदक विजेता ने कहा कि उन्हें अपने खेल और कोर्ट पर मूवमेंट में इन बदलावों का असर साफ नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से वह काफी अच्छा महसूस कर रही हैं और खुश हैं कि उनकी तैयारी सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
महिला एकल बैडमिंटन में बदला खेल का अंदाज
सिंधु ने महिला एकल बैडमिंटन में आए बदलावों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पहले खेल ज्यादा तेज और आक्रामक हुआ करता था, जबकि अब लंबी रैलियों और कोर्ट पर ज्यादा समय बिताने की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए धैर्य और शारीरिक फिटनेस पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि कोर्ट पर शटल का बहाव और परिस्थितियां हमेशा खिलाड़ी के पक्ष में नहीं होतीं। ऐसे समय में अनुभव के आधार पर तुरंत रणनीति बदलना और परिस्थितियों के मुताबिक खेलना जरूरी होता है।
प्रस्तावित 15 अंकों वाले स्कोरिंग प्रारूप को लेकर भी सिंधु ने माना कि इससे खेल की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। कम अंकों वाले मुकाबलों में शुरुआत से ही पूरी तरह सतर्क रहना होगा और खिलाड़ियों को हर अंक के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देनी होगी।
सिंधु ने कहा कि बैडमिंटन में बदलाव खेल का हिस्सा हैं। नए नियमों और स्कोरिंग प्रणाली के साथ भारतीय खिलाड़ियों को भी खुद को तेजी से ढालना होगा।
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