भारतीय रिजर्व बैंक की 25 आधार अंक की बढ़ोतरी से कर्ज महंगा होने की संभावना, मौजूदा होम लोन ग्राहकों की मासिक किस्तों पर पड़ सकता है सैकड़ों रुपये का असर
भारतीय रिजर्व बैंक की 25 आधार अंक की बढ़ोतरी से कर्ज महंगा होने की संभावना, मौजूदा होम लोन ग्राहकों की मासिक किस्तों पर पड़ सकता है सैकड़ों रुपये का असर
खबर खास | नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की है। इसके साथ रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले की घोषणा की।
इस फैसले से बैंकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ने की संभावना है और इसका सीधा असर खुदरा कर्ज लेने वालों पर पड़ सकता है। खास तौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की किस्त चुका रहे ग्राहकों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
अगर किसी व्यक्ति ने 20 साल के लिए 30 लाख रुपये का होम लोन 8.5 प्रतिशत ब्याज दर पर लिया है, तो उसकी मौजूदा मासिक किस्त करीब 26,035 रुपये है। अगर बैंक रेपो रेट में हुई पूरी 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का बोझ ग्राहक पर डालता है और ब्याज दर बढ़कर 8.75 प्रतिशत हो जाती है, तो मासिक किस्त बढ़कर लगभग 26,511 रुपये हो सकती है।
इसका मतलब है कि ग्राहक पर हर महीने करीब 476 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सालाना आधार पर यह अतिरिक्त भुगतान करीब 5,712 रुपये हो सकता है।
हालांकि, जरूरी नहीं कि कर्ज लेने वालों की मासिक किस्त में तुरंत बढ़ोतरी हो। बैंक किस्त को पहले की तरह बनाए रखते हुए कर्ज की अवधि बढ़ाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इससे तत्काल मासिक भुगतान बढ़ने से बच सकता है, लेकिन पूरे कर्ज की अवधि में चुकाए जाने वाले कुल ब्याज में बढ़ोतरी हो सकती है।
बड़े कर्ज पर इसका असर और ज्यादा हो सकता है। उदाहरण के लिए, 25 साल के लिए 50 लाख रुपये के होम लोन पर 7.5 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से मासिक किस्त करीब 36,950 रुपये होती है। अगर ब्याज दर बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो जाती है, तो मासिक किस्त लगभग 37,767 रुपये हो सकती है। यानी हर महीने करीब 817 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
अगर इस उदाहरण में पूरी कर्ज अवधि के दौरान ब्याज दर बढ़ी हुई ही रहती है और कर्ज की अवधि में कोई बदलाव नहीं किया जाता, तो अतिरिक्त ब्याज का बोझ करीब 2.45 लाख रुपये हो सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के इस फैसले का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग बैंक ब्याज दर में हुई बढ़ोतरी का कितना हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं। बैंक मासिक किस्त, कर्ज की अवधि या दोनों में बदलाव कर सकते हैं।
होम लोन लेने वालों के लिए रेपो रेट में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में ब्याज दर, मासिक किस्त और कर्ज की कुल लागत पर नजर रखने की जरूरत बढ़ाती है। खास तौर पर फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों को अपने बैंक की नई ब्याज दर और संशोधित भुगतान व्यवस्था की जानकारी लेते रहना चाहिए।
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