चीन की चौथी वरीय जोड़ी को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय जोड़ी; कोच सुमीथ रेड्डी बोले- सफर अभी खत्म नहीं हुआ
चीन की चौथी वरीय जोड़ी को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय जोड़ी; कोच सुमीथ रेड्डी बोले- सफर अभी खत्म नहीं हुआ
खबर खास | नई दिल्ली
भारत की ट्रेसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में इतिहास रचते हुए महिला युगल का पदक पक्का कर लिया है। हालांकि, भारतीय जोड़ी की नजर अब केवल पदक पर नहीं, बल्कि विश्व चैंपियनशिप के खिताब पर है। कोच सुमीथ रेड्डी का कहना है कि दोनों खिलाड़ी यहां सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि टूर्नामेंट जीतने के इरादे से उतरी हैं।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में शुक्रवार को खेले गए क्वार्टर फाइनल में ट्रेसा और गायत्री ने चीन की चौथी वरीय जिया यी फान और झांग शू शियान के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। भारतीय जोड़ी ने पहला गेम 16-21 से गंवाया, लेकिन इसके बाद जबरदस्त खेल दिखाते हुए अगले दोनों गेम 21-15 और 21-13 से अपने नाम कर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
इस जीत के साथ भारत ने महिला युगल में 2011 के बाद पहली बार विश्व चैंपियनशिप पदक सुनिश्चित किया है। इससे पहले ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने 2011 में इस स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।
कोच सुमीथ रेड्डी ने बताया कि घरेलू विश्व चैंपियनशिप की तैयारी करीब 45-50 दिन पहले शुरू कर दी गई थी। मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने पूरे अभियान की बारीकी से योजना बनाई और खिलाड़ियों को मैच दर मैच आगे बढ़ने पर ध्यान देने के लिए तैयार किया।
क्वार्टर फाइनल में शुरुआती दबाव के बावजूद भारतीय जोड़ी ने धैर्य नहीं खोया। दूसरे गेम में 7-10 से पिछड़ने के बाद ट्रेसा और गायत्री ने 11-10 की बढ़त बनाई और फिर 13-10 से आगे निकलते हुए मुकाबले का रुख बदल दिया। इसके बाद दोनों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और निर्णायक गेम में भी चीन की जोड़ी पर लगातार दबाव बनाए रखा।
रेड्डी के मुताबिक, जीत के बाद दोनों खिलाड़ियों की भावुक प्रतिक्रिया इस बात का संकेत थी कि उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कितनी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि दोनों अब किसी भी तरह रुकने के मूड में नहीं हैं और उनकी कोशिश विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने की है।
सेमीफाइनल से पहले टीम अपनी रणनीति में बड़े बदलाव नहीं करेगी। रेड्डी ने कहा कि खिलाड़ियों को अपनी तैयारी, आपसी संवाद और कमजोरियों को सुधारने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने साझेदारी को लेकर होने वाली आलोचनाओं से दूर रहते हुए खिलाड़ियों को अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
चोटों और मुश्किल दौर के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने धैर्य बनाए रखा और लगातार मेहनत की। पदक पक्का होने से दबाव कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अभियान अभी बाकी है। अब ट्रेसा और गायत्री पूरी ताकत के साथ सेमीफाइनल में उतरकर फाइनल का टिकट हासिल करने और भारत को विश्व खिताब दिलाने की कोशिश करेंगी।
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