₹26,000 करोड़ के प्रयागराज–सोनभद्र एक्सप्रेसवे, ₹9,039 करोड़ के विंध्य–पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और करीब 50,000 मेधावी छात्राओं को लाभ देने वाली योजना पर मुहर
₹26,000 करोड़ के प्रयागराज–सोनभद्र एक्सप्रेसवे, ₹9,039 करोड़ के विंध्य–पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और करीब 50,000 मेधावी छात्राओं को लाभ देने वाली योजना पर मुहर
खबर खास | लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास, कालिदास मार्ग पर हुई कैबिनेट बैठक में 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में दो नए एक्सप्रेसवे, संभल रिपोर्ट, उच्च शिक्षा और महिला कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।
कैबिनेट ने 333 किलोमीटर लंबे प्रयागराज–सोनभद्र एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब ₹26,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क और आवागमन को बेहतर बनाना है।
इसके अलावा 117 किलोमीटर लंबे विंध्य–पूर्वांचल लिंक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी गई है। यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। परियोजना की अनुमानित लागत ₹9,039 करोड़ है, जिसमें ₹5,628 करोड़ निर्माण कार्य के लिए निर्धारित हैं। इसके अलावा 1,731 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए भी धनराशि शामिल है। यह एक्सप्रेसवे गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली जिलों से होकर गुजरेगा।
कैबिनेट ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 1.18 किलोमीटर लंबे डायवर्जन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों से यातायात को दूर करना है। अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव से परियोजना की कुल लागत में कोई वृद्धि नहीं होगी।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े अहम फैसले के तहत कैबिनेट ने रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत राज्य के प्रत्येक कॉलेज की शीर्ष पांच छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। सरकार ने इसके लिए ₹400 करोड़ का बजट आवंटित किया है और करीब 50,000 मेधावी छात्राओं को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत विश्वविद्यालयों में शोध पीठ स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालयों को ₹2 करोड़ तक और कॉलेजों को ₹1 करोड़ तक की सहायता दी जा सकेगी। यह धनराशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाएगी और इससे मिलने वाले ब्याज का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों में किया जाएगा।
इसके लिए 50 वर्ष से अधिक पुराने और कम से कम 5,000 विद्यार्थियों वाले संस्थान पात्र होंगे। शोध पीठों के लिए सीएसआर फंड का भी उपयोग किया जा सकेगा।
इसके अलावा वाराणसी स्थित बसंत महिला विश्वविद्यालय में नए महिला छात्रावास के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। ₹2.48 करोड़ की लागत से बनने वाले इस छात्रावास में 112 छात्राओं के रहने की सुविधा होगी।
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