कहा, नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को मिला बढ़ावा केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए
कहा, नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को मिला बढ़ावा केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 भ्रष्टाचार मुक्त ग्रामीण रोजगार की गारंटी प्रदान करता है। यह ग्रामीण रोजगार नीति अधिक गारंटी वाले कार्यदिवस, उच्च मजदूरी, पारदर्शी भुगतान और टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण को सुनिश्चित करता है। इस नए कानून से पहले की मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार और खामियों को दूर किया गया है।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों के कल्याण और गांवों के विकास में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विकसित भारत-जी राम जी योजना शुरू की है। यह विषय देश के करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश परिवारों से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि वीबी जी-राम जी कानून का उद्देश्य उन वास्तविक श्रमिक लाभार्थियों का समर्थन करना है, जिन्हें पिछली सरकारों ने धोखा दिया था। यह अधिनियम परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी की व्यवस्था करता है, मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। श्रमिकों को गारंटीकृत रोजगार बढ़ाकर अधिक मजदूरी देती है। ये श्रमिक अब भ्रष्ट ठेकेदारों, अधिकारियों या राजनेताओं की तिजोरियाँ भरने के लिए नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा योजना लगभग 20 वर्ष पहले शुरू की गई थी। मनरेगा और ऐसी ही अन्य कई योजनाओं की प्रकृति ही ऐसी होती है कि इन्हें तैयार किया जाता है, पारित किया जाता है, लागू किया जाता है और इनमें सुधार भी किया जाता है। मनरेगा के अंतर्गत कई समस्याएं सामने आईं, जैसे कि श्रमिकों के बजाय मशीनों का उपयोग करना, बजट का अत्यधिक अनुमान, पहले से पूर्ण की गई परियोजनाओं को दोबारा करना, और ऐसी ही कई कमियां देखने को मिलीं, लेकिन आज सच्चाई यह है कि देश, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पिछले 20 वर्षों में मूल रूप से बदल चुके हैं। ग्रामीण गरीबी वर्ष 2011-12 में जहां 25 प्रतिशत से अधिक थी, वहीं आज यह घटकर लगभग 5 प्रतिशत से भी नीचे आ चुकी है। इसका अर्थ है कि वर्तमान केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण 25 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सेवाओं, डी.बी.टी., आधार और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। ऐसे में एक पुराने, खामियों से भरे ढांचे को बिना सुधार के ढोते रहना न तो श्रमिकों के हित में था और न ही राष्ट्र के।
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