बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी आपदाओं से पहले मिलेगी चेतावनी, परियोजना पर खर्च होंगे करीब 53 करोड़ रुपये
बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी आपदाओं से पहले मिलेगी चेतावनी, परियोजना पर खर्च होंगे करीब 53 करोड़ रुपये
हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, भारी बारिश और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए मौसम निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के 116 संवेदनशील स्थानों पर स्वचालित मौसम स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने इन स्टेशनों के लिए स्थानों का चयन कर लिया है और इस पूरी परियोजना पर करीब 53 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वचालित मौसम स्टेशनों के जरिए स्थानीय स्तर पर मौसम से जुड़ा सटीक और समय पर डेटा उपलब्ध हो सकेगा। इन स्टेशनों से बारिश, तापमान और मौसम में होने वाले अन्य बदलावों की लगातार निगरानी की जाएगी।
मौसम की स्थिति में अचानक होने वाले बदलावों का समय रहते पता चलने से प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट जारी करने में मदद मिलेगी। इससे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे से पहले सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रस्तावित योजना के तहत शिमला जिले में सबसे अधिक 24 स्वचालित मौसम स्टेशन लगाए जाएंगे। इसके अलावा सिरमौर में 18, चंबा और मंडी में 14-14, सोलन में 10, कांगड़ा में 9, किन्नौर में 7, बिलासपुर में 6, ऊना में 5, कुल्लू में 4, हमीरपुर में 3 और लाहौल-स्पीति में 2 मौसम स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
मानसून के दौरान हिमाचल के कई हिस्सों में भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में इन स्वचालित मौसम स्टेशनों से मिलने वाला स्थानीय स्तर का मौसम डेटा प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे मौसम संबंधी खतरों की निगरानी बेहतर होने के साथ-साथ समय रहते चेतावनी जारी करने की क्षमता भी मजबूत होने की उम्मीद है।
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