विधानसभा चुनाव से पहले पंथक मंच पर शक्ति प्रदर्शन, चन्नी के समर्थन में उठी सीएम चेहरे की मांग; अकाली दल ने वापसी का दावा किया, भाजपा ने दिखाया हरियाणा मॉडल, मान ने कांग्रेस-शिअद-भाजपा पर बोला हमला
विधानसभा चुनाव से पहले पंथक मंच पर शक्ति प्रदर्शन, चन्नी के समर्थन में उठी सीएम चेहरे की मांग; अकाली दल ने वापसी का दावा किया, भाजपा ने दिखाया हरियाणा मॉडल, मान ने कांग्रेस-शिअद-भाजपा पर बोला हमला
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब में माघी मेले की तरह बाबा बकाला साहिब का रखड़ पुण्या मेला भी धार्मिक और पंथक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरु तेग बहादुर साहिब से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों के कारण इस मेले में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यही वजह है कि धार्मिक आस्था के इस बड़े केंद्र पर राजनीतिक दल भी अपने सियासी संदेश को जनता तक पहुंचाने और ताकत का प्रदर्शन करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
इस बार रखड़ पुण्या का राजनीतिक महत्व इसलिए और बढ़ गया, क्योंकि पंजाब विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं। शुक्रवार को मेले में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मंच सजाए और धार्मिक-पंथक माहौल के बीच चुनावी जमीन मजबूत करने के लिए जमकर सियासी हुंकार भरी। नेताओं के भाषणों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ 2027 की सत्ता की लड़ाई के संकेत भी साफ दिखाई दिए।
कांग्रेस के सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं का शक्ति प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा सम्मेलन में नजर नहीं आए। इसके उलट मंच पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक राणा गुरजीत सिंह, पूर्व मंत्री त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा और विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया समेत चन्नी समर्थक नेताओं की मौजूदगी रही।
कांग्रेस के इस मंच से आम आदमी पार्टी की सरकार पर जमकर निशाना साधा गया। साथ ही चन्नी समर्थकों ने खुलकर यह संदेश देने की कोशिश की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाना चाहिए। समर्थकों ने हाईकमान से इस मामले में जल्द फैसला लेने की मांग की। राजनीतिक हलकों में इसे चन्नी गुट की ओर से प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और खास तौर पर राजा वड़िंग को दी जा रही खुली चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल ने भी रखड़ पुण्या के मंच से अपनी ताकत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया समेत अकाली दल का वरिष्ठ नेतृत्व सम्मेलन में मौजूद रहा। अकाली नेताओं ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी मजबूत वापसी करेगी और आम आदमी पार्टी के खिलाफ बड़ी राजनीतिक चुनौती पेश करेगी। पिछले विधानसभा चुनाव में बेहद कमजोर प्रदर्शन के बाद अकाली दल अब अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने और पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश में जुटा है। रखड़ पुण्या का सम्मेलन इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा ने भी इस बार पहली बार यहां अलग राजनीतिक पहचान के साथ अपना सम्मेलन आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन किया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों समेत कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे। भाजपा नेताओं ने पंजाब की भगवंत मान सरकार को नशे, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर घेरा। शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब की जनता से भाजपा को राज्य को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने का अवसर देने की अपील की। इस दौरान भाजपा की ओर से पंजाब के सामने हरियाणा मॉडल को भी एक विकल्प के तौर पर पेश किया गया।
रखड़ पुण्या में अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का सम्मेलन भी राजनीतिक रूप से खास रहा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस धड़े ने पहली बार इस बड़े पारंपरिक राजनीतिक मंच पर अपनी ताकत और चुनावी दिशा को खुलकर सामने रखा। सम्मेलन में नशे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। पार्टी की ओर से घोषणा की गई कि अगर उसे सत्ता में आने का अवसर मिलता है तो 1997 से 2027 तक पंजाब में नशे के फैलाव को लेकर श्वेतपत्र जारी किया जाएगा। यह घोषणा आने वाले चुनाव में नशे के मुद्दे को प्रमुख राजनीतिक हथियार बनाने के संकेत के तौर पर देखी जा रही है।
इन तमाम राजनीतिक सम्मेलनों के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। मान ने शिरोमणि अकाली दल पर आरोप लगाया कि वह भाजपा के साथ दोबारा गठजोड़ करने के लिए बेचैन है। उन्होंने अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस तीनों को निशाने पर लेते हुए आम आदमी पार्टी को पंजाब के हितों की अकेले लड़ाई लड़ने वाली पार्टी के रूप में पेश किया।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान को भी अपने हमले का आधार बनाया। चन्नी समर्थकों की ओर से मुख्यमंत्री चेहरे की मांग और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर भी सियासी चर्चाएं तेज रहीं।
कुल मिलाकर, इस बार का रखड़ पुण्या मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की शुरुआती सियासी तस्वीर का भी अहम मंच बन गया। कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान, अकाली दल की सत्ता में वापसी की कोशिश, भाजपा का पंजाब में विस्तार का प्रयास और नए पंथक राजनीतिक समीकरणों की दस्तक ने यह साफ कर दिया कि आने वाले चुनाव की जंग के लिए सभी दलों ने अभी से अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है।
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