भारत का दूसरा गोल्ड मेडल, पदक तालिका में 12वें स्थान पर पहुंचा; 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया को 6.6 अंकों से हराया
भारत का दूसरा गोल्ड मेडल, पदक तालिका में 12वें स्थान पर पहुंचा; 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया को 6.6 अंकों से हराया
खबर खास | नागोया (जापान)
भारत ने एशियन गेम्स 2026 में अपना दूसरा गोल्ड मेडल जीत लिया है। शुक्रवार को 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में भारत की सु्रुचि और कमलजीत की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने कुल 484.6 अंक हासिल कर पहला स्थान हासिल किया। यह इन खेलों में शूटिंग में भारत का पहला गोल्ड मेडल है।
इस जीत के साथ भारतीय निशानेबाजों ने देश की पदक तालिका में कुल 10 पदक जोड़ दिए हैं, जिनमें एक गोल्ड, पांच सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इससे पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता था।
फाइनल मुकाबले में सु्रुचि और कमलजीत की जोड़ी ने दक्षिण कोरिया को 6.6 अंकों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। भारत ने 484.6 अंक हासिल किए, जबकि दक्षिण कोरिया 478.0 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और उसे सिल्वर मेडल मिला। ईरान ने 415.8 अंकों के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।
इस गोल्ड मेडल के साथ भारत पदक तालिका में 12वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत के खाते में अब कुल 19 पदक हो गए हैं, जिनमें दो गोल्ड, आठ सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सुलखा गांव के रहने वाले कमलजीत ने अपने खेल करियर की शुरुआत एथलेटिक्स से की थी। हालांकि, 2019 में लगी गंभीर चोट के कारण उन्हें एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को अपना नया खेल चुना और कई चुनौतियों के बावजूद धीरे-धीरे इसमें अपनी पहचान बनाई।
करियर के मुश्किल दौर में कमलजीत ने कई बार शूटिंग छोड़ने तक का विचार किया, लेकिन उनके माता-पिता ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। परिवार के समर्थन और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने खुद को एक प्रतिभाशाली निशानेबाज के रूप में स्थापित किया।
20 वर्षीय सु्रुचि इंदर सिंह हरियाणा के झज्जर की रहने वाली हैं। उन्होंने महज 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू कर दी थी। वर्तमान में वह भिवानी स्थित गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग अकादमी में कोच सुरेश सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं।
खास बात यह है कि सु्रुचि के परिवार की शुरुआती इच्छा थी कि वह कबड्डी खेलें, लेकिन उन्होंने शूटिंग को अपना करियर चुना। अपने इस फैसले को सही साबित करते हुए सु्रुचि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उभरती हुई निशानेबाज के रूप में पहचान बनाई है। अब एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने भारत के लिए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
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