इस्तांबुल में प्रदर्शनकारियों ने अजरबैजान सरकार से स्कूलों की वेशभूषा संबंधी संशोधित नियमों पर पुनर्विचार करने की मांग की
इस्तांबुल में प्रदर्शनकारियों ने अजरबैजान सरकार से स्कूलों की वेशभूषा संबंधी संशोधित नियमों पर पुनर्विचार करने की मांग की
खबर खास | नई दिल्ली
मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सरकार की ओर से स्कूलों की वेशभूषा संबंधी नियमों में बदलाव किए जाने के बाद विरोध शुरू हो गया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़ों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिन्हें अधिकारियों के अनुसार देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता।
नियमों में बदलाव के बाद हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचने वाली कुछ छात्राओं और शिक्षिकाओं को कथित तौर पर कक्षाओं में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके विरोध में विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और संशोधित वेशभूषा नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए।
इस विवाद का असर पड़ोसी देश तुर्किये में भी देखने को मिला है। पिछले सप्ताह इस्तांबुल में अजरबैजान के वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और उन्होंने अजरबैजान सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
स्कूलों में एक समान वेशभूषा लागू करने पर जोर
अजरबैजान सरकार का कहना है कि सभी विद्यार्थियों को स्कूलों में निर्धारित वेशभूषा संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए। संशोधित नियमों को लागू करने के उद्देश्य से स्कूलों की पोशाक संबंधी व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं।
हालांकि, इन पाबंदियों का विरोध भी हो रहा है। विरोध करने वाले विद्यार्थियों और अन्य लोगों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक परिधान पहनने पर प्रतिबंध लगाने से धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित होती है।
इस मुद्दे ने अजरबैजान की सीमाओं से बाहर भी ध्यान आकर्षित किया है। इस्तांबुल में प्रदर्शनकारियों ने नए नियमों के प्रति विरोध जताते हुए सरकार से नीति की समीक्षा करने और स्कूलों में हिजाब पहनने पर लगी पाबंदियों से जुड़ी चिंताओं का समाधान करने की अपील की।
धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष नियमों पर बहस
अजरबैजान मुस्लिम बहुल देश है और इसकी लगभग 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। ऐसे में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर उठा विवाद धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष वेशभूषा नियमों के पालन से जुड़े सवालों को फिर से चर्चा में ले आया है।
इस विवाद के बीच एक ओर सरकार स्कूलों में निर्धारित वेशभूषा नियमों के पालन पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले लोग धार्मिक परिधान पहनने पर लगी पाबंदियों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
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