चोट से वापसी के बाद ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने रचा इतिहास, 15 साल बाद विश्व चैंपियनशिप में भारत को महिला युगल का पदक
चोट से वापसी के बाद ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने रचा इतिहास, 15 साल बाद विश्व चैंपियनशिप में भारत को महिला युगल का पदक
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भारतीय बैडमिंटन की जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने विश्व चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया। सेमीफाइनल में चीन की गत चैंपियन लियू शेंग शू और तान निंग से हार के बावजूद भारतीय जोड़ी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। विश्व चैंपियनशिप में महिला युगल में भारत को 15 साल बाद यह पदक मिला है। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने कांस्य पदक जीता था।
सेमीफाइनल मुकाबले में ट्रीसा और गायत्री ने शानदार शुरुआत की और पहला गेम 21-18 से जीतकर चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी पर दबाव बना दिया। हालांकि, इसके बाद लियू और तान ने जोरदार वापसी की। चीनी जोड़ी ने दूसरा गेम 21-13 से जीता और निर्णायक गेम में भारतीय खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं देते हुए 21-8 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
सेमीफाइनल में हार के बावजूद गायत्री इस पूरे अभियान को लेकर बेहद खुश नजर आईं। उन्होंने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि यह उनके लिए “बेहद शानदार यात्रा” रही। टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले भारतीय जोड़ी के सामने कई चुनौतियां थीं। ट्रीसा की टखने की चोट के कारण वह करीब तीन महीने तक प्रतियोगिताओं से दूर रही थीं।
इसके बाद फिलीपींस चैलेंज में वापसी ने दोनों खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया। गायत्री ने बताया कि विश्व चैंपियनशिप में उतरते समय उनका सबसे बड़ा लक्ष्य खुद पर भरोसा बनाए रखना था। फिलीपींस चैलेंज के बाद दोनों खिलाड़ियों को अपनी लय हासिल करने में मदद मिली और इसका असर विश्व चैंपियनशिप में साफ दिखाई दिया।
टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में भारतीय जोड़ी ने स्पेन और अमेरिका की जोड़ियों को हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उन्होंने बड़ा उलटफेर करते हुए चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फान और झांग शू शियान को मात दी। इस जीत के साथ ट्रीसा और गायत्री ने पदक पक्का कर लिया और भारतीय बैडमिंटन में नया इतिहास बना दिया।
गायत्री के मुताबिक क्वार्टर फाइनल की जीत का राज अपनी रणनीति पर भरोसा रखना और पूरे मुकाबले में धैर्य बनाए रखना था। दोनों खिलाड़ी बिना किसी बड़ी उम्मीद के कोर्ट पर उतरी थीं, लेकिन उनके आत्मविश्वास और आक्रामक खेल ने उन्हें ऐतिहासिक जीत दिलाई।
सेमीफाइनल में भी भारतीय जोड़ी ने चीन की मजबूत जोड़ी को कड़ी चुनौती दी। खास तौर पर ट्रीसा की कोर्ट पर मौजूदगी और उनका लगातार उत्साह बढ़ाना गायत्री के लिए बड़ी ताकत साबित हुआ। गायत्री ने अपनी जोड़ीदार की ऊर्जा और समर्थन की जमकर तारीफ की।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को दर्शकों के जबरदस्त समर्थन ने और भावुक बना दिया। गायत्री ने कहा कि स्टेडियम को दर्शकों से भरा देखकर वह काफी हैरान थीं। भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक पदक की जीत नहीं, बल्कि चोट, चुनौतियों और उतार-चढ़ाव के बाद शानदार वापसी की कहानी भी बन गया।
गायत्री ने इस उपलब्धि को याद करते हुए कहा कि इस सफर में खुशी, भावुकता और गर्व समेत कई भावनाएं एक साथ जुड़ी रहीं। ट्रीसा और गायत्री का यह कांस्य पदक भारतीय महिला बैडमिंटन के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है।
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