पाठक ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को संसद में नौकरी दिलाने का वादा करके ₹50,000 लिए थे; उसे 2016 में भगोड़ा घोषित किया गया था।
पाठक ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को संसद में नौकरी दिलाने का वादा करके ₹50,000 लिए थे; उसे 2016 में भगोड़ा घोषित किया गया था।
खबर खास | लुधियाना
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लोकसभा सचिवालय में फर्जी नौकरी का झांसा देने से जुड़े धोखाधड़ी के एक मामले में लगभग एक दशक से फरार चल रहे भगोड़े आरोपी जितेंद्र पाठक को गिरफ्तार कर लिया है। पाठक को लुधियाना से गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई के अनुसार, 13 जुलाई 2009 को पाठक और उसके साथी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। दोनों ने कथित तौर पर एक व्यक्ति से संसद में नौकरी दिलाने का वादा किया था और इसके बदले उससे ₹50,000 लिए थे।
शिकायत के आधार पर सीबीआई ने इस कथित धोखाधड़ी की जांच शुरू की। जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने दिसंबर 2009 में अदालत में दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद पाठक अदालत के समक्ष पेश नहीं हुआ। इसके बाद जांच एजेंसी ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन वह कई वर्षों तक लापता रहा।
2016 में, अदालती कार्यवाही से लगातार अनुपस्थित रहने पर अदालत ने पाठक को भगोड़ा घोषित कर दिया।
सीबीआई ने उसका पता लगाने के प्रयास जारी रखे और आखिरकार लुधियाना से उसे ढूंढकर गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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