पुलिस ने संसद मार्च को रोका, शिक्षा सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने J.P. नड्डा से बातचीत की मांग की
पुलिस ने संसद मार्च को रोका, शिक्षा सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने J.P. नड्डा से बातचीत की मांग की
खबर खास | नई दिल्ली
शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया।
प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए जंतर-मंतर के आसपास भारी बैरिकेडिंग की गई थी। जब प्रदर्शनकारी संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के इलाके में पहुंचे, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। संसद परिसर और उसके आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया तथा सुरक्षाकर्मियों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने पर सहमति जताई है। इससे जारी आंदोलन के बीच बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जगी है।
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सरकार से संसद के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल बंद करने की अपील की। उन्होंने केंद्र सरकार से दमन के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने और छात्रों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री को बदलने की भी अपील की।
इस बीच, कॉक रोच जनाता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील के बाद अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दिया। वांगचुक को 21 दिनों के लंबे उपवास के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी थी और वर्तमान में वह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं।
दिपके ने 18 जुलाई को अपना अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया था। यह कदम वांगचुक के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती होने के बाद उठाया गया था। सोमवार को सीजेपी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात के लिए रवाना हुए, जबकि पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक जंतर-मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते रहे।
प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं।
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