झोटा का शव सात दिनों से मानसा के अस्पताल में रखा है, कार्रवाई समिति का धरना जारी; पंजाब सरकार ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए तीन महिला आईएएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी।
झोटा का शव सात दिनों से मानसा के अस्पताल में रखा है, कार्रवाई समिति का धरना जारी; पंजाब सरकार ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए तीन महिला आईएएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी।
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें शहीद बताया है। उन्होंने झोटा के परिवार के लिए न्याय की मांग की है।
रविवार को दोसांझ ने अपने इंस्टाग्राम खाते पर झोटा की तस्वीर साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “शहीद परविंदर सिंह। दुख की इस घड़ी में पूरा पंजाब उनके परिवार के साथ खड़ा है। परिवार को न्याय मिलना चाहिए।”
झोटा मेडिकल स्टोरों पर कथित तौर पर नशीले पदार्थों और दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के अंदर दिनदहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने कथित तौर पर उस समय झोटा पर गोली चलाई, जब उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाएं बेचे जाने को लेकर सवाल उठाया। पुलिस ने बाद में आरोपी को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार कर लिया। घटना के समय झोटा फेसबुक पर सीधा प्रसारण कर रहे थे।
इस बीच, पंजाब सरकार ने झोटा की हत्या के मामले में गठित कार्रवाई समिति के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। सरकार ने समिति से संवाद करने के लिए तीन महिला आईएएस अधिकारियों की टीम बनाई है।
इस टीम में कंवलप्रीत कौर बराड़, अपनीत रियायत और मानसा की उपायुक्त नवजोत कौर शामिल हैं। बराड़ फरीदकोट मंडल की आयुक्त हैं, जबकि अपनीत रियायत पहले मानसा की उपायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं।
इससे पहले सरकार ने पुलिस अधिकारियों के माध्यम से बातचीत शुरू करने का प्रयास किया था, लेकिन कार्रवाई समिति ने उनके साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था।
सरकार की यह नई पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब मामले में न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। झोटा का शव सात दिनों से मानसा के अस्पताल में रखा हुआ है। अभी तक उनका पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हुआ है।
कार्रवाई समिति मृतक कार्यकर्ता के लिए न्याय की मांग कर रही है। सरकार की ताजा पहल का उद्देश्य बातचीत का रास्ता फिर से खोलना और हत्या के बाद उठाई जा रही मांगों पर चर्चा करना है।
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